सामूहिक विवाह योजना को लेकर प्रशासन ने पहले तो लापरवाही दिखाई, लेकिन अब उसे मार्च में रकम लैप्स होने से बचाने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। इस मामले को लेकर डीएम ने 30 मार्च को सभी स्थानीय निकायों और बीडीओ की बैठक बुर्लाई है। इस लापरवाही पर नोडल अफसर समाज कल्याण अधिकारी पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में निर्धन गरीब कन्याओं की शादी के लिए जनवरी में 1.66 करोड़ का बजट रिलीज हुआ था। समाज कल्याण विभाग को इस रकम से 476 जोड़ों का विवाह निकायों के अधिकारियों और बीडीओ की मदद से कराना था, लेकिन अफसरों ने सीएम की प्राथमिकता वाली इस योेजना में दिलचस्पी ही नहीं ली। इसकी वजह से केवल 56 जोड़ों के ही विवाह हो सके हैं। इस पर सिर्फ 20 लाख रुपये ही खर्च हुए हैं। बाकी रकम बीडीओ और निकायों के अधिकारियों के खातों में डंप है। अधिकारियों की हीलाहवाली से इस योजना की अवशेष रकम 31 मार्च तक लैप्स हो जाएगी। इसके लिए सीधे तौर से नोडल डिपार्टमेंट समाज कल्याण विभाग ही जिम्मेदार होगा। अब सामूहिक विवाह योजना की रकम सरेंडर होते देख अधिकारियों में खलबली मची हुई है। डीएम ने इस योजना को लेकर 30 मार्च को सभी निकायों के अधिकारी और बीडीओ को बुलाया गया है। जिला समाज कल्याण अधिकारी अशोक दीक्षित ने बताया कि सामूहिक विवाह की काफी रकम बची हुई है। कोशिश की जा रही है कि इस धनराशि को लैप्स होने से बचा लिया है। हालांकि इसे लेकर अंतिम फैसला शासन को ही लेना है।