बरेली। पीडब्ल्यूडी भवन खंड में फर्जी हस्ताक्षर कर वेतन-एरियर के 1.28 करोड़ रुपये निकालने के मामले में अधिशासी अभियंता अब्दुल सत्तार ने चार कर्मचारियों का वेतन रोक दिया गया है, जबकि एक के निलंबन की संस्तुति की है। इस मामले में अब्दुल सत्तार भी आरोपी हैं, लेकिन अब तक उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
पीडब्ल्यूडी भवन खंड में 1.28 करोड़ के गबन के मामले में अधिशासी अभियंता अब्दुल सत्तार ने प्रशासनिक अधिकारी सुरेंद्र पाल, खंडीय लेखाधिकारी राहुल शर्मा, तत्कालीन अधिष्ठान सहायक रितेश आनंद, पटल सहायक अभिषेक आनंद का सितंबर का वेतन रोक दिया है। आदेश जांच पूरी होने व क्लीन चिट मिलने तक प्रभावी रहेगा। पटल सहायक अभिषेक सक्सेना को निलंबित करने के लिए अधीक्षण अभियंता प्रकाश चंद्र को पत्र लिखा है।
एफआईआर दर्ज होने में भी फंसा पेच
मामले में अधिशासी अभियंता की तरफ से कोतवाली में एक सप्ताह पहले तहरीर दी गई थी। इसमें फर्जी भुगतान के मामले में एक मार्च 2020 से चार जनवरी 2021 तक तैनात रहे प्रशासनिक अधिकारी सुरेंद्र पाल, खंडीय लेखाधिकारी राहुल शर्मा, तत्कालीन अधिष्ठान सहायक रितेश आनंद, पटल सहायक अभिषेक आनंद, तत्कालीन अधिशासी अभियंता प्रवीण कुमार व वर्तमान अधिशासी अभियंता अब्दुल सत्तार का नाम दिया है। इसमें पुलिस की तरफ से सभी के हस्ताक्षर मांगे गए हैं। कर्मचारियों के हस्ताक्षर करने से मना करने की वजह से अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं हो सकी है।
यह है पूरा मामला
11 अधिकारियों-कर्मचारियों के अवशेष वेतन, एरियर भुगतान के नाम पर 1.28 करोड़ रुपये निकाले गए। एक प्रकरण में 67.57 लाख रुपये व दूसरे प्रकरण में 61.04 लाख रुपये निकाले गए। जांच में पाया कि इन 11 कर्मियों में से सिर्फ एक अवर अभियंता का 94,589 का बिल सही पाया गया। शेष 10 अधिकारियों व कर्मचारियों का भुगतान फर्जी पाया गया है। ये कभी विभाग में तैनात ही नहीं रहे।
मामले की जांच चल रही है। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। एक कर्मचारी के निलंबन का पत्र मिला है। चार कर्मियों के वेतन रोके जाने का मामला संज्ञान में है। - प्रकाश चंद्र, अधीक्षण अभियंता, पीडब्ल्यूडी