बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय परिसर में लेपर्ड और टाइगर कोई खतरनाक वन्यजीव नहीं, बल्कि खूबसूरत तितलियों के नाम हैं। परिसर की समृद्ध जैव विविधता में इन दोनों प्रजातियों के साथ कुल 30 किस्मों की तितलियां और 80 प्रजातियों के पक्षी अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं।
विश्वविद्यालय के कृषि संकाय में बतौर प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस सेवाएं दे रहे डॉ. अनिल साहनी ने इस जैव विविधता को संजोया है। उन्होंने परिसर के चप्पे-चप्पे को खंगालते हुए लगभग 80 प्रजातियों के पक्षियों, 30 किस्मों की तितलियों और अन्य कई वन्यजीवों को अपने कैमरे में कैद किया है। वह बताते हैं कि ये तितलियां और पक्षी, कृषि और पर्यावरण के संतुलन में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इनके विचरण के आधार पर कृषि विशेषज्ञ फसल चक्र का अंदाजा लगाते हैं। ये विद्यार्थियों के लिए शोध का केंद्र भी हैं।
परिसर के शांत कोनों और घने पेड़ों के बीच चमगादड़, इंडियन फ्लाइंग फॉक्स, इंडियन हेयर, सुनहरे सियार, साही और नेवले घूमते नजर आते हैं। हरियाली के बीच अजगर और कोबरा जैसे खतरनाक सांपों की मौजूदगी इस बात की गवाही देती है कि यह परिसर उनके लिए सुरक्षित और अनुकूल ठिकाना बन चुका है।
कृषि विभाग और प्लांट साइंस विभाग के अध्यक्ष प्रो. उपेंद्र बालियान ने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में व्यापक काम किया गया है। कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल के मार्गदर्शन में मियावाकी वन की स्थापना की गई। इसने यहां के पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूत कर दिया है।