एमजेपी रुहेलखंड यूनिवर्सिटी में वर्ष 2009 से पहले पीएचडी करने वालों का रिकार्ड नहीं मिल पा रहा है। इसका खुलासा सोमवार को तब हुआ जब नेट से छूट का सर्टिफिकेट लेने पहुंचे तमाम अभ्यर्थियों को शोध विभाग ने रिकार्ड न मिल पाने की बात कह कर लौटा दिया। इस पर अभ्यर्थियों ने नाराजगी जतायी। इस शिकायत को गंभीरता से लेकर प्रतिकुलपति ने कुलसचिव से रिकार्ड का पता लगाने को कहा है। अगर रिकार्ड नहीं मिला तो सैकड़ों पीएचडी उपाधिधारकों के सर्टिफिकेट फंस जाएंगे।
वर्ष 2009 से पहले शोध करने वाले काफी समय से नेट से छूट का सर्टिफिकेट मांग रहे थे अब तक रुहेलखंड यूनिवर्सिटी इसके लिए तैयार नहीं थी। यूजीसी की गाइड लाइन का हवाला देकर सर्टिफिकेट जारी नहीं किये जा रहे थे। पिछले दिनों पीएचडी करने वालों ने काफी हंगामा किया तो ओपन वाइवा को छोड़कर यूनिवर्सिटी अन्य पांच बिंदुओं का सर्टिफिकेट देने को तैयार हो गई। इसके लिए कुलसचिव ने 19 अगस्त को एक सरकुलर जारी करके महज चार दिन में यानी 23 अगस्त तक अभ्यर्थियों से आवेदन मांगे। बहुत सारे अभ्यर्थी सोमवार को आवेदन लेकर पहुंचे तो यूनिवर्सिटी ने दो बिंदुओं का सर्टिफिकेट सुपरवाइजर से लाने की बात कही। प्रतिकुलपति प्रो. वीपी सिंह चूंकि प्लांट साइंस विभाग के कई शोधार्थियों के सुपरवाइजर रहे हैं इसलिए उन्होंने अपने अंडर में शोध करने वाले दो अभ्यर्थियों के सुपरवाइजर सर्टिफिकेट जारी कर दिये। सोमवार को दोनों अभ्यर्थी जब अपने सर्टिफिकेट जारी कराने के लिए शोध विभाग में पहुंचे तो उनसे कह दिया गया कि वे शोध पंजीकरण का भी ब्यौरा लेकर आएं क्योंकि यूनिवर्सिटी के पास अभी रिकार्ड उपलब्ध नहीं है। दोनों ने इसकी शिकायत प्रतिकुलपति से की। उन्होंने विभाग केे कर्मचारियों से इसकी वजह पूछी तो उन्हें भी रिकार्ड न मिल पाने की जानकारी दी गई। कहा गया कि रिकार्ड ढूंढना पड़ेगा तब सर्टिफिकेट जारी किये जाएंगे। इससे नाराज प्रतिकुलपति ने कुलसचिव डॉ. साहिबलाल मौर्य से रिकार्ड जुटाने को कहा है। यह भी कहा है कि अगर रिकार्ड मौजूद नहीं है तो ढूंढा जाए, अन्यथा अभ्यर्थियों के सर्टिफिकेट न बन पाने के लिए शोध विभाग जिम्मेदार होगा। कुलसचिव ने उनको रिकार्ड जुटाने का आश्वासन दिया है।
कोट...
सर्टिफिकेट जारी करने के लिए शोध विभाग में रिकार्ड उपलब्ध न हो पाना गंभीर बात है। कुलसचिव से रिकार्ड उपलब्ध कराने को कहा गया है ताकि 2009 से पहले के शोध करने वालों को समय से सर्टिफिकेट जारी हो सके।
-प्रो. वीपी सिंह, प्रतिकुलपति