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रुविवि कैंपस: कला वर्ग की ओर कम हुआ विद्यार्थियों का रुझान

Sun, 04 Oct 2026 12:42 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
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बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों का रुझान कला वर्ग की ओर घट रहा है। पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार इस वर्ग में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या कम हुई है।
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मीडिया सेल के मुताबिक, विश्वविद्यालय परिसर में 23 विभाग संचालित हैं। इनमें विज्ञान, तकनीकी शिक्षा और प्रबंधन विभाग के अलावा शिक्षा, मानविकी, इतिहास और संस्कृति विभाग में कई कोर्स संचालित हैं। मास्टर ऑफ सोशल वर्क में पिछले साल 52 प्रवेश हुए, लेकिन इस बार 26 विद्यार्थियों ने ही प्रवेश लिया। एमए साइकोलॉजी में पिछले साल 61 प्रवेश हुए, इस बार 44 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। एमए अंग्रेजी में पिछले साल 32 प्रवेश हुए, जबकि इस साल 30 विद्यार्थियों ने ही दाखिला लिया है। पीजी डिप्लोमा योग में पिछले साल 41 प्रवेश हुए, जो इस साल 17 ही रह गए। एमए पाली में पिछले और इस साल किसी विद्यार्थी ने प्रवेश नहीं लिया।
= पीजी डिप्लोमा इन मीडिया लॉ में तीन ने लिया प्रवेश -
विधि विभाग के अधीन संचालित पीजी डिप्लोमा इन मीडिया लॉ में पिछले साल चार और इस साल मात्र तीन विद्यार्थियों ने ही प्रवेश लिया। अडल्ट एजुकेशन के तहत संचालित डिप्लोमा इन वीमेन इम्पॉवरमेंट और एंट्रॉप्रेन्योरशिप में छह-छह प्रवेश हुए। भाषा डिप्लोमा में मंदारिन में सर्वाधिक 18 प्रवेश हुए, जबकि ऑनलाइन चल रहे स्पेनिश, जर्मन और फ्रेंच भाषा में चार-छह विद्यार्थियों ने ही प्रवेश लिया।
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= पत्रकारिता कोर्स की फीस 40 हजार रुपये, बरेली कॉलेज में मात्र 12 हजार-
पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में दाखिले के लिए इस साल एक विद्यार्थी ने आवेदन किया, जिसको लौटाना पड़ा। पिछले साल इस कोर्स में छह विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया था। इस कोर्स की फीस 40 हजार रुपये प्रति वर्ष है। बरेली कॉलेज में इसी कोर्स की फीस 12 हजार रुपये है। विभागाध्यक्ष ने फीस कम कराने के लिए पूर्व कुलपति को कई बार पत्र लिखा लेकिन फीस कम नहीं हो सकी। नतीजतन इस वर्ष मात्र एक आवेदन ही रहा, जिसे लौटाना पड़ा।

वर्जन.
पीजी डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश नहीं हुए हैं। जिन पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों के प्रवेश की संख्या कम रही है, उन पर ध्यान दिया जाएगा। विश्वविद्यालय इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश बढ़ाने के लिए प्रयास करेगा। - महेश कुमार, कुलसचिव
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