बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से लैस होने के दावों के बावजूद यूनिवर्सिटी कंप्यूटर सेंटर (यूसीसी) में इंटरनेट की सुविधा नदारद है। वर्ष 2018 से यहां रखे 200 कंप्यूटर इंटरनेट के अभाव में धूल फांक रहे हैं। इससे विश्वविद्यालय के एआई संबंधी दावे खोखले साबित हो रहे हैं।
करीब बीस साल पहले स्थापित यूसीसी एक समय छात्र-छात्राओं के लिए महत्वपूर्ण पठन-पाठन का केंद्र था। वर्ष 2018 तक यहां विद्यार्थियों की भीड़ रहती थी, जब इंटरनेट उपलब्ध था। अब इंटरनेट की गति इतनी धीमी है कि विद्यार्थी अपना कोई कार्य या प्रोजेक्ट पूरा नहीं कर पाते। यही कारण है कि साल भर यूसीसी में कोई विद्यार्थी नहीं आता। विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों के छात्र भी इस सुविधा का लाभ नहीं उठा पाते। विश्वविद्यालय के अन्य विभागों तक भी इंटरनेट की पहुंच नहीं है। विभागीय शिक्षक अपने शोध कार्यों के लिए अपने पैसों से इंटरनेट रीचार्ज कराते हैं।
इंटरनेट कनेक्टिविटी का संकट
विश्वविद्यालय में बीएसएनएल की लोकल एरिया नेटवर्क (लैन) फाइबर बिछी हुई है। हालांकि, जगह-जगह फॉल्ट होने के कारण यह विभागों तक काम नहीं करती। यूसीसी सेंटर में भी बेहद धीमी गति के कारण विद्यार्थी अपना कार्य नहीं कर पाते। इससे छात्रों को आधुनिक तकनीक सीखने में बाधा आ रही है।
यूनिवर्सिटी कंप्यूटर सेंटर तब बनाया गया जब सभी विभागों कंप्यूटर नहीं थे, तब एक शेड्यूल के अनुसार सभी यहां आते थे, अब सभी विभागों में अपनी कंप्यूटर शाला है। इसलिए यहां विद्यार्थी नहीं आते। वहीं, यूसीसी सेंटर में बीएसएनएल की 100 जीबीपीएस का लैन नेटवर्क है, हालांकि विभागों तक पहुंचते हुए बीच-बीच में समस्या आती है। - प्रो. एसएस बेदी, प्रभारी, यूनिवर्सिटी कंप्यूटर सेंटर