प्राथमिकता में रहा पठन-पाठन त्यागा विधायकी का वेतन
इतिहास विभाग के प्रो. विजय बहादुर ने बताया कि विधायक रहते हुए प्रो. श्याम बिहारी ने कभी विधायक पद का वेतन नहीं लिया। वह पूर्णकालिक शिक्षक की तरह कार्य करते थे। वह पठन-पाठन के लिए समर्पित थे। उन्होंने अपने जीवन में एक पुस्तक प्राचीन भारत में यवन लिखी। प्रो. श्याम बिहारी लाल की पत्नी मंजूलता बिथरी ब्लाक के उच्च प्राथमिक विद्यालय डोहरा में कार्यरत हैं। बेटा ईशान दिल्ली में सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहा है। बड़ी बेटी शिल्पी रक्षा संपदा अधिकारी के पद पर बरेली में ही कार्यरत हैं। छोटी बेटी शिवानी रिजर्व बैंक मुंबई में कार्यरत हैं।
जीआईसी के हॉस्टल से विधानसभा तक रहा साथ
फरीदपुर विधायक डॉ. श्याम बिहारी लाल और मीरगंज विधायक डीसी वर्मा, दोनों पढ़ाई काल से ही गहरे दोस्त रहे। वर्ष 1981 से 1985 तक शाहजहांपुर में जीआईसी हॉस्टल में एक कमरे में रहकर कक्षा-9 से 12 तक पढ़े। एक तख्त और एक बिस्तर पर लेटते थे। डीसी वर्मा ने बताया कि कभी मैं उनकी ड्रेस पहन लेता था तो कभी वह हमारे कपड़े पहन लेते थे। पढ़ाई के समय दोनों दोस्त आपस में खूब लड़ते-झगड़ते भी थे। विधानसभा में भी हमारी और डॉ. श्याम बिहारी लाल की सीट अगल-बगल ही थी। उनकी 35 और हमारी 36 नंबर सीट रही।
जीवन के अंतिम दिन भी दोनों ने एक-दूसरे से ठिठोली कर ली। डीसी वर्मा ने बताया कि उन्होंने 2006 में डॉ. श्याम बिहारी लाल के साथ तय किया कि अब राजनीतिक क्षेत्र में उतरा जाए। डीसी वर्मा ने 2006 में ही सरकारी नौकरी छोड़ दी और बसपा के टिकट पर मीरगंज से चुनाव लड़े थे, जबकि डॉ. श्याम बिहारी लाल ने भाजपा के टिकट पर फरीदपुर से चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में दोनों दोस्तों को हार मिली थी। वर्ष 2017 में दोनों भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े और विधायक बन गए थे। 2022 में हम दोनों फिर विधायक बने।
दिवंगत विधायक के छोटे भाई की पत्नी हैं भुता ब्लॉक प्रमुख
दिवंगत विधायक डॉ. श्याम बिहारी लाल दो भाइयों में बड़े हैं। छोटे भाई डॉ. श्रीपाल बदायूं जिला अस्पताल में त्वचा रोग विशेषज्ञ पद पर तैनात हैं। उनकी पत्नी भुता ब्लॉक की प्रमुख हैं।