बरेली। स्कूल वैन के तौर पर इस्तेमाल हो रही ज्यादातर मारुति इको और मारुति वैन अनफिट होने के बावजूद बच्चों की जिंदगी खतरे में डाल रही हैं। आरटीओ के मुताबिक इनमें से करीब 60 फीसदी गाड़ियाें का फिटनेस सर्टिफिकेट एक्सपायर हो चुका है। बगैर कॉमर्शियल परमिट इन गाड़ियों को सड़कों पर दौड़ाकर टैक्स की भी चोरी की जा रही है। जल्द ही विभाग इन गाड़ियों को सीज करने का अभियान शुरू करेगा।
बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर पिछले दिनों डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह ने आरटीओ के साथ दूसरे विभागों को संयुक्त रूप से अभियान चलाकर स्कूल वाहनों की फिटनेस और परमिट की जांच करने का निर्देश दिया था। आरटीओ की ओर से इसके बाद जांच की गई तो पता चला कि बसों या दूसरे बड़े वाहनों की तुलना में ज्यादातर स्कूली बच्चों को लाने-ले जाने के लिए मारुति इको और वैन का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन गाड़ियों को कॅमर्शियल के बजाय निजी परमिट पर चलाया जा रहा है। जांच में पता चला कि जिले में ऐसी कुल 651 पांच और आठ सीट क्षमता की गाड़ियां हैं, जिनमेें से करीब 60 फीसदी 15 साल से ज्यादा पुरानी हैं और फिटनेस न होने की वजह से उनका रजिस्ट्रेशन तक निलंबित किया जा चुका है। आरटीओ ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द इन गाड़ियों का नवीनीकरण न कराया गया तो अभियान चलाकर उन्हें सीज कर दिया जाएगा।
फिर नहीं मिलेगा बचाव का मौका
एआरटीओ प्रशासन आरपी सिंह ने बताया कि मोटर यान अधिनियम के अनुसार स्कूल वैन के तौर पर इस्तेमाल हो रही गाड़ियों पर कॅमर्शियल परमिट होना जरूरी है। बगैर परमिट के पकड़े गए वाहन को थाने में बंद करने के साथ 22 सौ रुपये प्रति सीट टैक्स और आठ हजार का जुर्माना वसूल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि ऐसे वाहन संचालकोें को वैध परमिट कराने की आखिरी चेतावनी दी गई है। वे आरटीओ कार्यालय में काउंटर नंबर एक पर परमिट और दूसरे कागजात पूरे करा सकते हैं। अभियान शुरू होने के बाद उन्हें बचाव का कोई मौका नहीं दिया जाएगा।