बरेली। शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों की 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर दाखिला दिलाने की प्रक्रिया जिले में चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। बृहस्पतिवार से तीसरे चरण का आगाज हो गया है, लेकिन पिछले चरणों के आंकड़े चिंताजनक हैं। विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार कागजों के सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद जिले के 2786 विद्यार्थियों को अब तक स्कूलों में प्रवेश नहीं मिल सका है।
आरटीई पोर्टल पर अब तक कुल 8,124 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से दस्तावेजों में कमियों और आवेदन की त्रुटियों के चलते केवल 6,257 आवेदकों का ही भौतिक सत्यापन सफल रहा। इसके बाद लॉटरी में 3,471 आवेदकों के नाम चयनित हुए और उन्हें प्रवेश पत्र जारी किए गए। सत्यापन होने के बाद बड़ी संख्या में छात्र स्कूल की दहलीज तक नहीं पहुंच पाए।
विभागीय जांच में सामने आया है कि आवेदनों के निरस्त होने या प्रवेश न मिल पाने का मुख्य कारण दस्तावेजों में विसंगतियां हैं। इस संबंध में बीएसए डॉ. विनीता ने स्पष्ट किया कि आवेदनों को निरस्त करने का प्राथमिक आधार दस्तावेजों के सत्यापन में पाई गई खामियां ही हैं।
तीसरे चरण में अभी तक आए दो आवेदन
आरटीई के तहत बृहस्पतिवार से शुुरू हुए तीसरे चरण के आवेदन में अभी तक विभाग को केवल दो ही आवेदन प्राप्त हुए हैं। इसमें बहेड़ी मेंं एक और नगर पालिका परिषद आंवला से भी एक ही आवेदन प्राप्त हुआ है।