बरेली कॉलेज ग्राउंड पर आयोजित आरएसएस के कार्यक्रम शिव शक्ति संगम के मंच से अस्पृश्यता मिटाने का संदेश दिया गया। प्रमुख वक्ताओं के संबोधन का सार यही था कि एकता में ही शक्ति है और हम सब हिंदू हैं। कहा गया कि जब संघ का विस्तार देश के प्रत्येक गांव तक हो जाएगा, समाज से भेदभाव मिट जाएगा। वक्ता संघ का इतिहास बताकर लोगों को संघ से जोड़ते नजर आए।
बरेली कॉलेज ग्राउंड पर लंबे समय बाद संघ का कोई बड़ा आयोजन किया गया। सूर्य नमस्कार और योगासन के बाद संघ के रीति-रिवाजों के अनुसार ध्वज फहराने और उतारने की प्रक्रिया संपन्न हुई। जोश से भरे बच्चे से लेकर बुजुर्ग स्वयंसेवक तक यहां मौजूद थे। बीच-बीच में होने वाले शंखनाद ने स्वयंसेवकों के उत्साह को दोगुना कर दिया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संयुक्त क्षेत्र के प्रचार प्रमुख कृपाशंकर ने संघ के इतिहास पर प्रकाश डाला। बताया कि सन 1925 में डॉॅ. हेडगेवार द्वारा आरएसएस रूप में जो एक पौधा लगाया था, आज वह वटवृक्ष का रूप ले चुका है। संघ की 1925 से लेकर आज तक की यात्रा में विभिन्न उतार-चढ़ाव रहे। संघ को कई बार समाप्त करने का भी प्रयास हुआ। आपातकाल में प्रतिबंध लगाया गया। मगर संघ का अस्तित्व मजबूत होता गया।
उन्होंने बताया कि संघ में कोई जाति या उपजाति नहीं होती, यहां हर कार्यकर्ता हिंदू होता है और सभी हर क्षण देश सेवा के लिए तत्पर रहते हैं। कुछ प्रसंगों के माध्यम से संघ परिवार में महिलाओं के योगदान पर भी बताया। बोले, गांधी जी ने भी कहा था कि आरएसएस समाज से जाति पात के भेदभाव को समाप्त कर सकता है। अस्पृश्यता को समाप्त करने के लिए संघ निरंतर प्रयास कर रहा है, जिस प्रकार कबड्डी के खेल में एक पाला से एक खिलाड़ी दूसरे पाले में जाता है तो उधर के सभी खिलाड़ी एक साथ मिलकर विरोधी के आक्रमण को ध्वस्त करते हैं। इसी प्रकार संघ भी प्रत्येक सामाजिक व्यक्ति को साथ मिलाकर राष्ट्रवादी ताकतों से लड़ता है।
गांव तक दिखे संघ
महामंडलेश्वर यतींद्रानंद
गिरी ने कहा कि कार्यक्रम में महानगर के प्रत्येक मंडल के स्वयंसेवकों की उपस्थिति बता रही है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का वृक्ष विस्तार ले रहा है। अब इसे देश के प्रत्येक गांव तक पहुंचाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश कोई जमीन का टुकड़ा नहीं है, संकल्प लें कि सब मिलकर देश हित में काम करेंगे।
दिखीं तीन पीढ़ियां
बड़े स्तर पर आयोजित संघ के इस कार्यक्रम को लेकर बच्चों से लेकर बुजुर्गों में तक उत्साह दिखा। सरस्वती शिशु मंदिरों के बच्चों ने जहां गणवेश में भाग लिया था, वहीं विभाग व्यवस्था प्रमुख अरविंद बंसल, अपने बेटे सौरभ और साढ़े चार साल के पौत्र कुशाग्र के साथ पहुंचे।