विभीषिका स्मृति प्रदर्शनी लगाई, प्रश्नोत्तरी भी हुई
कार्यक्रम के दौरान विभाजन विभीषिका स्मृति प्रदर्शनी लगाई गई। इसमें देश विभाजन के समय के विभिन्न स्थानों के चित्रों, समाचार पत्रों की कटिंग को दिखाया गया। इसमें उस समय लोगों ने किस तरह से त्रासदी झेली, उसे दिखाया गया। भारतीय संस्कृति और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी प्रश्नोत्तरी का भी आयोजन हुआ।
देशभक्ति को समर्पित बिहार का एक गांव
संघ प्रमुख ने अपने संबोधन में बिहार के गाजीपुर जिले के गांव मलखाचक का जिक्र किया। कहा कि आजादी की पहली लड़ाई 1857 से 1947 तक गंगा किनारे बसा यह गांव क्रांतिकारियों का केंद्र रहा। क्षेत्र के राजा बाबू कुंवर सिंह की सेना के सेनापति भी इसी गांव के निवासी थे। आजादी की लड़ाई में सक्रिय तत्कालीन गदर पार्टी, अनुशीलन समिति के साथ सरदार भगत सिंह, खुदीराम बोस, कन्हई दत्त आदि क्रांतिकारी यहां रहकर अपनी योजना बनाते थे।
इसकी जानकारी मिलते ही अंग्रेजों ने तोप लगाकर इस गांव को उजाड़ दिया था, मगर कुछ समय बाद ही यह गांव फिर आबाद हो गया। कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान इस गांव में एक बड़ा आयोजन किया गया। मुझे उसमें जाने का अवसर मिला। गांव की एकता और सौहार्द देखकर मैं दंग रह गया। इस तरह का अनुशासन और समर्पण देश के हर गांव में हो तो हमारा देश विश्वगुरु के रूप में स्थापित हो जाएगा। बताया कि इस गांव का महात्मा गांधी ने भी दौरा किया था।
कमिश्नर ने तन्यमता से सुना संबोधन
संघ के कुटुंब स्नेह मिलन समारोह में उपस्थित मंडलायुक्त संयुक्ता समद्दार, संघ प्रमुख का संबोधन ध्यान से सुनती रहीं और उसे लिखती भी रहीं। समारोह के बाद हुए सहभोज में उन्होंने संघ प्रमुख के साथ भोजन भी किया।