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200 रुपये में फीड हो रहा है राशन कार्ड

Wed, 16 Mar 2016 01:53 AM IST
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली
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राशन कार्ड की फीडिंग हो या फिर तहसील से बनने वाले जाति, आय और निवास प्रमाणपत्र। इन सभी के आवेदन फीड कराने के 100 से लेकर 200 रुपये तक लिए जा रहे हैं। यहां तक कि ये केंद्र कस्बों और शहर के वार्डों के स्थान पर तहसील और कलक्ट्रेट के आसपास अवैध तरीके से चल रहे हैं। शिकायतें हुईं हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती। पिछले सप्ताह जिला पूर्ति कार्यालय में इस तरह की एक सौ से अधिक शिकायतें हुईं तो जिला पूर्ति अधिकारी केएल तिवारी ने उनका चिट्ठा तैयार करके डीएम और एनआईसी को भेज दिया। एनआईसी के माध्यम से इस तरह के अब तक ढाई सौ से अधिक मामले आए हैं। 50 मामलों में कार्रवाई की गई, करीब एक सौ मामले अभी भी जांच की जा रही है।
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प्रमाणपत्र और राशन कार्ड के नाम पर तहसीलों में हो रहे भ्रष्टाचार को रोकने के लिए प्रदेश सरकार ने आन लाइन सिस्टम शुरू किया है। जिसके पीछे मंशा है कि शहरों और गांवों के बेरोजगारों को रोजगार मिले और लोग प्रमाणपत्र बनवाने के लिए तहसीलों के चक्कर न लगाएं। उन्हीं के गांव और मुहल्लों में यह सुविधा मिले। सरकार की इस मंशा का लोकवाणी केद्रों के प्रभारी दुरुपयोग कर रहे हैं। तहसीलों के लेखपालों से लोकवाणी केंद्रों के प्रभारियों ने गठजोड़ कर लिया है और निर्धारित शुल्क 20 रुपये से दस गुना तक रकम ली जा रही है।

नंबर फीड न कराने वाले छह केंद्र बंद
एनआईसी ने आवेदकों के मोबाइल नंबर न देने मीरगंज चार और शहर के दो लोकवाणी केंद्रों को बंद कर दिया है। प्रशासन ने अधिक शुल्क लिए जाने के आरोपों की पुष्टि के लिए सभी आवेदकों के नंबर फीड करने के आदेश किए थे लेकिन संचालकों ने उनके नंबर ही नहीं भेजे। ऐसे में आवेदकों से पुष्टि नहीं हो पाई तो प्रशासनिक अधिकारियों के निर्देश पर लोकवाणी केंद्र बंद कर दिए। एनआईसी के जिला सूचना विज्ञान अधिकारी मनोज शर्मा ने बताया कि ऐसे लोकवाणी केंद्रों को बंद कर दिया गया है। भविष्य में जिन केंद्रों से मोबाइल नंबर का ब्योरा नहीं आएगा, उन्हें भी बंद कर दिया जाए।
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