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बरेली-पीलीभीत रोड पर सिर्फ गड्ढे गिनिए

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बरेली। सिस्टम में गहरे तक जड़ें जमा चुकी कमीशनखोरी सड़कों की गुणवत्ता को खा गई है। मरम्मत पर ध्यान न देने और गुणवत्ता को कमीशन की भेंट चढ़ा देने का ही नतीजा है कि बारिश ने सड़कों की काया उधेड़ दी है। जर्जर पुल भी अब और ज्यादा खतरनाक हो गए हैं। बरेली-पीलीभीत हाईवे पर सफर के दौरान कब, कहां हादसे का शिकार हो जाएं, हर वक्त यही खौफ दिल-ओ-दिमाग पर हावी रहता है। नकटिया पुल की हालत सबसे ज्यादा खराब है। कांडू पुल की रेलिंग जर्जर हो चुकी है। कई गहरे गड्ढे भी हैं। किसी तरह रेंगते हुए वाहन यहां से निकलते हैं। बरेली से नवाबगंज तक कदम-कदम पर जानलेवा गड्ढे हैं। एनएचएआई के पीडी अमित प्रकाश का कहना है कि इस रोड पर बारिश के बाद पैचवर्क होगा। सौंदर्यीकरण और नए निर्माण के लिए टेंडर 27 अगस्त को खोले जाएंगे।
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रिठौरा
यहां बाजार के बीच में सड़क का चौड़ीकरण हुआ है। सीमेंटेड सड़क बनाई गई है। दोनों ओर चौड़े नालों का निर्माण भी किया गया, लेकिन अब नाले टूट चुके हैं और उनमे कूड़ा भरा है। नाले चोक हो जाने से पानी का निकास नहीं होता है। नाला और सड़क की ऊंचाई में छह इंच का ही फर्क है। ऐसे में बैैैरिकैडिंग न होने से नालों की टूटी पटिया से गाड़ी अनियंत्रित होकर नाले में भी गिर सकती है।
नकटिया पुल
नकटिया नदी पर पुल सबसे ज्यादा खतरनाक स्थिति में है। पुल के दोनों ओर गहरे गड्ढे होने से यहां गाड़ियों की रफ्तार कम करनी पड़ती है। लिहाजा दिन भर जाम लगा रहता है। पुल की हालत इस कदर जर्जर है कि उसकी सरिया तक बाहर दिखाई दे रही हैं। रात के अंधेरे में दूर से गड्ढे न दिखाई देने के कारण हादसों का खतरा बना रहता है। यहां कुछ गड्ढों का पैचवर्क सीमेंटेड ईंटों से कर दिया गया था, लेकिन अब ईंटे भी अब उखड़ गईं हैं।
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हाफिजगंज-राजघाट
हाफिजगंज क्षेत्र में एक हिस्से पर सड़क बैठी हुई है। कई गड्ढे हैं। यहां वाहन धीमी रफ्तार से गुजरते हैं। यहां पहुंचते ही ट्रैफिक धीमे होकर गुजरने लगता है। इसी तरह राजघाट पर सड़क पर कई बड़े गड्ढे हैं। यहां से वाहन धीमी रफ्तार से होकर गुजरते हैं। गड्ढों के नुकीले पत्थरों की वजह से यहां वाहनों के पहिये अक्सर पंक्चर होते रहते हैं।
कांडू पुल और कांडू बाईपास।
कांडू पुल से पहले करीब सौ मीटर तक सड़क पूरी उखड़ चुकी है। कई गहरे गड्ढे हैं। इसके बराबर में पीडब्लूडी ने एक सड़क बना दी है जो आगे जाकर इसी सड़क से मिल जाती है लेकिन इस पर वाहनों के फिसलने का खतरा होने के कारण कोई भारी वाहन उस पर नहीं चढ़ता है। वाहन किसी तरह हिचकोले खाते हुए पुरानी सड़क से ही गुजरते हैं। इसी तरह कांडू पुल जर्जर हो चुका है। एक तो पुल की चौड़ाई बहुत कम है, ऊपर से गहरे गड्ढे हैं। एक तरफ की रेलिंग का हिस्सा भी क्षतिग्रस्त है। ऐसे में यहां हादसे का खतरा अधिक रहता है।
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