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Bareilly: फर्जी बिल बनाकर भुगतान करने के आरोपी रोडवेज के सेवा प्रबंधक निलंबित, ARM पर भी कार्रवाई की संस्तुति

Thu, 29 May 2025 07:44 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

बरेली परिक्षेत्र के रोडवेज के सेवा प्रबंधक धनजी राम को निलंबित कर दिया गया है। उन पर फर्जी बिल बनाकर भुगतान करने का आरोप लगा है। इसके अलावा पीलीभीत, बरेली और रुहेलखंड डिपो के एआरएम पर भी कार्रवाई की संस्तुति की गई है। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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बरेली में फर्मों के नाम पर फर्जी बिल बनाकर भुगतान करने के आरोपी रोडवेज के सेवा प्रबंधक को निलंबित कर दिया गया है। अमर उजाला पड़ताल कर खुलासे के बाद शासन व परिवहन निगम ने संज्ञान लिया है। इसके साथ ही पीलीभीत, बरेली और रोहिलखंड डिपो के एआरएम पर भी कार्रवाई की संस्तुति की गई है।

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परिवहन निगम मुख्यालय के प्रबंध निदेशक मासूम अली सरवर की ओर से आदेश जारी हुए हैं। इसमें कहा गया है कि सेवा प्रबंधक धनजी राम ने अपने कर्तव्यों और दायित्वों के निर्वहन में घोर उदासीनता बरती है। बसों के मेंटनेंस में पाई गई अनियमितता की जांच में सहयोग ना करने, मेंटनेंस के आभाव में असंचालित हो रही बसों के कारण निगम की छवि जनमानस में धूमिल होने, बिना टेंडर प्रक्रिया संपन्न कराये ही अनाधिकृत फर्म से काम लेने और फर्म के नाम पर फर्जी बिल बनावाकर भुगतान कराकर निगम को वित्तीय क्षति पहुंचाई गई है। 

वहीं निर्गत आदेशों, निर्देशों का अनुपालन न करने आदि के मामलों में तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। वहीं उन्हें निलंबन के दौरान मुख्य प्रधान प्रबंधक (प्राविधिक) परिवहन निगम मुख्यालय से अटैच किया है।

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मुख्यमंत्री कार्यालय ने लिया था संज्ञान, तब हुई मामले में कार्रवाई
नवंबर व दिसंबर में भ्रष्टाचारियों के खुलासे को लेकर अमर उजाला में प्रकाशित हुई खबरों का शासन ने तक संज्ञान लिया था। इसी मामले का मुख्यमंत्री ने संज्ञान लिया तो 16 दिसंबर 2024 को परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव ने मामले में जांच के निर्देश दिए थे। इस प्रकरण में रोडवेज कर्मचारियों और अफसरों के खिलाफ मुख्यालय को स्पष्टीकरण भेजने में भी अधिकारियों के पसीने छूट गए थे। वहीं लगभग 150 बसों की मरम्मत के फर्जी बिलों का भी खुलासा किया था।
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पांच माह के बाद हो सकी कार्रवाई
दरअसल रोडवेज में हो रहे भ्रष्टाचार को लेकर बसों इंटन, गियर बॉक्स, पंप बदलने से लेकर बसों के अनुबंध नवीनीकरण के नाम पर घूसखोरी के मामलों का खुलासा किया गया था। इसके अलावा फर्जी बिलों के माध्यम से बसों की मरम्मत का भुगतान के प्रकरण को भी साक्ष्य सहित साबित करते हुए खबर को प्रकाशित किया था। पिछले साल नवंबर और दिसंबर में इन खबरों को लगातार प्रकाशित करने के बाद ही प्रकरण में जांच बैठी थी। अब पांच माह बाद इन मामलों में कार्रवाई शुरू हो सकी है।
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