विवादों में घिरे रुहेलखंड डिपो के एआरएम सत्येंद्र कुमार वर्मा का स्थानांतरण हो गया है। उनको गोरखपुर के मिचलौल डिपो में इसी पद पर भेजा गया है। उनके स्थान पर मिचलौल डिपो के एआरएम भुवनेश्वर कुमार को तैनाती दी गई है। एआरएम सत्येंद्र कुमार वर्मा यहां लगातार विवादों में घिरे रहे। कभी कर्मचारियों से काम को लेकर विवाद हुआ तो कभी संगठनों से समस्याओं को लेकर विवाद, जिसके चलते कर्मचारी उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते रहे रहे। पिछले सप्ताह उनके डिपो का लिपिक रिश्वत लेते हुए एंटी करप्शन की टीम ने रंगेहाथ पकड़ा था।
इसमें भी एआरएम पर परिचालिक और लिपिक दोनों ने ही एआरएम के इशारे पर रिश्वत के लेनदेन की बात कही थी। इस मामले में लिपिक को जेल भेज दिया गया और रोडवेज ने भी उसे निलंबित कर दिया। साथ ही इस मामले की अभी जांच भी चल रही थी। इसी बीच शुक्रवार को मुख्यालय से एआरएम वर्मा के स्थानांतरण का आदेश आ गया। इस स्थानांतरण को इसी रिश्वतखोरी के मामले से जोड़कर देखा जा रहा है। आरएम एसके बनर्जी का कहना है कि एआरएम का स्थानांतरण प्रशासनिक आधार पर हुआ है। रिश्वतखोरी के मामले में जांच विभागीय स्तर पर चल रही है।
कर्मचारियों का प्रबंधन पर आरोप
शुक्रवार को रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद से जुड़े संचालन शाखा के पदाधिकारियों की यूनियन कार्यालय पर बैठक हुई। इसमें एआरएम रुहेलखंड सत्येंद्र कुमार वर्मा के खिलाफ रोष व्यक्त किया गया और आरोप लगाया गया कि भ्रष्टाचार में फंसे एआरएम को परिवहन निगम प्रबंधन बचाने में लगा है जबकि उनके खिलाफ सारे सुबूत हैं। शाखा अध्यक्ष धारा सिंह की मौजूदगी में हुई बैठक में उमर अली, जावेद खां, नरेश शर्मा, इसरार अहमद, शमशाद अली, मुस्तजाब अली, डीपी सिंह, गोविंद गुप्ता, आरिफ मियां आदि मौजूद रहे।