बरेली। ठेकेदार सीमेंट के बजाय भ्रष्टाचार के मसाले से शहर की सड़कों का निर्माण करा रहे हैं। नगर आयुक्त की सख्ती के बाद कराई गई तकनीकी जांच में इसका खुलासा हुआ है। 17 में से 11 फर्मों के नमूने जांच में फेल पाए गए।
अब संबंधित ठेकेदारों को जुर्माना भरने के साथ ही दोबारा सड़क का निर्माण कराना होगा। जांच में सीएम ग्रिड योजना, नगर निगम निधि, 15वें वित्त आयोग और एनकैप परियोजना के तहत 30-30 लाख रुपये की लागत से प्रस्तावित कार्यों को शामिल किया गया था। इस कार्रवाई से ठेकेदारों में खलबली मची है।
नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जांचने के लिए बृहस्पतिवार को खुद ही लैब पहुंच गए। उन्होंने 17 फर्मों की ओर से कराए जा रहे कार्यों के सैंपल मांगे और उनकी जांच कराई। इनमें 11 नमूने फेल पाए गए।
जांच के दौरान कई स्थानों पर सड़कों और नालियों के निर्माण की गुणवत्ता बेहद घटिया पाई गई। इस पर उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन स्थानों पर गुणवत्ता खराब मिली है, वहां दोबारा खोदाई करवाकर मानक के अनुरूप निर्माण कराए जाएं। ऐसा नहीं करने पर संबंधित फर्मों पर जुर्माना लगाने के साथ ही उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। संवाद