10 वर्ष होगी सड़क की मियाद
नई तकनीक से तैयार सड़क की मियाद 10 वर्ष है। पुरानी तकनीक में भी यही मियाद होती है। पांच वर्ष तक मरम्मत की जिम्मेदारी इस तकनीक में भी निर्माण करने वाली फर्म की होती है। विदेशी तकनीक एफडीआर सबसे पहले हैदराबाद में आई। जर्मनी में मैटेरियल तैयार करने के लिए मशीन बनी। इसी मशीन से निर्माण हो रहा है।
यूपी के कुछ अभियंताओं को सबसे पहले हैदराबाद में प्रशिक्षण दिलाया गया। फिर विभिन्न जिलों में काम शुरू हुए। पहले चरण में चित्रकूट, सीतापुर, आगरा में सड़कें बनीं थीं। इन्हें दिखाकर ही उत्तर प्रदेश रूरल रोड डेवपलेपमेंट अथॉर्टी ने ट्रेनिंग कराई है।
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ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के सहायक अभियंता संजय कुमार ने बताया कि मैंने पिछले वर्ष एफडीआर तकनीक के लिए सीतापुर में प्रशिक्षण लिया, फिर जिले में पहली सड़क का निर्माण शुरू कराया है। नवंबर तक सड़क की सतह बन जाएगी। डामर संबंधी काम दिसंबर और जनवरी की सर्दी में नहीं हो सकता है, इसलिए फरवरी में काम पूरा होने के आसार हैं।