कंसल्टिंग इंजीनियर की जांच में बेदम मिले आरओ सिस्टम, बिल्वा में इंटरलॉकिंग में हुआ खेल
बरेली। भोजीपुरा ब्लॉक की ग्राम पंचायत मुड़िया हाफिज में 24.44 लाख की लागत से लगाए गए आरओ सिस्टम कंसल्टिंग इंजीनियर की जांच में बेदम पाए गए। ग्राम पंचायत ने इसके लिए अनिल एसोसिएट्स को 14वें वित्त आयोग में प्राप्त अनुदान से भुगतान किया गया है। ज्यादातर भुगतान बिना बिल के हुए हैं और एक बिल दो भुगतान प्रक्रिया में अटैच कर ऑनलाइन किया गया है। इसी तरह बिल्वा में कराए गए विकास कार्यों में भी धांधली सामने आई है। डीपीआरओ ने संंबंधित फर्मों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है।
बिल्वा ग्राम पंचायत में कांट्रैक्टर रमेश नारायण गुप्ता ने हाईवे पुलिया से श्मशान भूमि तक इंटरलॉकिंग कराया है। कंसल्टिंग इंजीनियर पिंकी शर्मा की जांच में एस्टीमेट के मुताबिक 320 मीटर इंटरलॉकिंग का खर्च 19.17 लाख रुपये पाया गया, लेकिन मौके पर इसकी लंबाई 224 मीटर ही मिली। इसमें मिट्टी, चिनाई कार्य भी एस्टीमेट के मुताबिक नहीं कराया गया है। इसका मूल्यांकन महज 13.94 लाख रुपये है। इस तरह एस्टीमेट व मूल्यांकन की राशि में 4.42 लाख का अंतर है।
मुड़िया हाफिज ग्राम पंचायत में लगे आरओ सिस्टम की जांच में स्टेबलाइजर, फिल्टर, वाटर कूलर में लीकेज जैसी समस्याएं पाई गई हैं। कई जगह करंट आने की बात सामने आई है। गांव में बड़ी मस्जिद और हुजूर अहमद के घर के पास के आरओ सिस्टम में फिल्टर ही नहीं लगे हैं। प्रेमपाल की चौपाल पर लगा आरओ सिस्टम बंद है। किसी भी आरओ सिस्टम में चैंबर नहीं बने हैं। कंसल्टिंग इंजीनियर की जांच में ग्रामीणों ने बताया कि आरओ सिस्टम लगने के दो-तीन दिन बाद ही फिल्टर खराब हो गए थे। संवाद