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रंगयात्रा के साथ शुरू हुआ उत्तरायणी मेला

Fri, 15 Jan 2016 01:34 AM IST
बरेली
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बरेली। सूर्य के उत्तरायण होते ही शहर में पहाड़ की लोकसंस्कृति ने ऐसी छटा बिखेरी कि लोग उसी रंग में रंग गए। उत्तरायणी मेले में पहाड़ी वेश भूषा, वाद्य यंत्र, लोक नृत्य से सजी रंगयात्रा ने हर किसी को अपने साथ जोड़ा तो बरेली क्लब मैदान में भी हुजूम उमड़ पड़ा।  
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उत्तरायणी जनकल्याण समिति की ओर से आयोजित उत्तरायणी मेले बृहस्पतिवार को सुबह नौ बजे हुआ। डीएम गौरव दयाल ने अंबेडकर पार्क  कोतवाली से हरी झंडी दिखाकर रंगयात्रा की शुरुआत की। इसमें 16 सांस्कृतिक टीमें शामिल हुईं। आराध्य देवी ‘नंदा सुनंदा’ को अपने कंधों पर बैठाए युवा यात्रा की शोभा बढ़ा रहे थे। पारंपरिक वेशभूषा में छोलिया नृत्य में तो हर कोई थिरकता नजर आया।  पिछौड़ा (पीली और लाल चुनरी) ओढ़े बच्चियां लंबी नथ पहनकर नृत्य करती रहीं। युवाआें ने भी पीले, लाल और गुलाबी रंगों के परिधानों में खूब धमाल मचाया। रंगयात्रा में शामिल छात्रों की टोली पारंपरिक झांकियों के साथ स्वच्छता और जागरू कता का संदेश भी दे रहे थे। जगह-जगह लोगाें ने रंगयात्रा पर फूल बरसाए। बरेली क्लब मैदान में मेला स्थल पहुंचने पर केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने नारियल फोड़कर मेेले की विधिवत शुरुआत कराई। यहां सांस्कृतिक कार्यक्रमों से पहाड़ की संस्कृति के दर्शन हुए। बरेली में पुलिस सेवा में तैनात वीएस पोखरिया, शिक्षिका नीता जोशी और कैप्टन खुशबू पाटनी को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में महापौर डॉ. आईएस तोमर, विधायक भगवत शरण गंगवार, पूर्व सांसद प्रवीण सिंह ऐरन, पूर्व महापौर सुप्रिया ऐरन, संयुक्त आयकर आयुक्त एसके शर्मा आदि शामिल हुए।

टिहरी की रानी, पौड़ी की दीवानी...
मेले में  सांस्कृतिक पंडाल भी गुलजार हो गया है। स्थानीय कलाकाराें के साथ जौनपुर लोक कला मंच से सुनीता पवार, मां पार्वती लोक कलामंच बागेश्वर से रंजीत दफौटी के निर्देशन में आई टीमाें ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी। एकल गायकों की कड़ी में ललित मोहन जोशी और लता तिवारी ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को मुग्ध कर दिया। ललित मोहन ने टक टका टक कमला बाटुली लगाए, परदेश मुलुक मैं घर बुलाए.. गाया। अल्मोड़ा की गायिका लता तिवारी ने टिहरी की रानी, पौड़ी की दीवानी...मैं छू बांद गढ़वाली... गाया तो लोगों ने खूब तालियां बजाई। तिलहा तेरी लंबी लटी, टसर का फूना... और पान पनुली चकोरा, तिलधार बोल... सुनकर भी लोग मुग्ध हो गए।
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गहत और भट्ट की दाल भी आई
बरेली। मेला स्थल पर लगे स्टाल में पहाड़ी उत्पादों की खूब खरीदारी हो रही है। गहत की दाल, भट्ट की दाल, सोयाबीन और भांग की बीज लोग पसंद कर रहे हैं। कारोबारी मडुवे का आटा, बुरांस का जूस, गडेरी की सब्जी, नीबू और कई तरह के आचार व नमकीन भी पहाड़ से लेकर आए हैं।
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