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Bareilly News: बारिश से नदियां उफनाईं, तटवर्ती इलाकों के बाशिंदों की बढ़ीं मुश्किलें

Thu, 03 Sep 2026 12:39 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
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मीरगंज/सिरौली/दुनका। पहाड़ी इलाकों और जिले में लगातार बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं। तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई किसानों के खेतों में पानी भर गया है। लोगों ने प्रशासन से बचाव उपाय करने की मांग की है।
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रामगंगा नदी का कटान कपूरपुर क्षेत्र में गंगा मंदिर तक पहुंच गया है, जिससे स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है। मीरगंज एसडीएम निधि शुक्ला ने बुधवार को बाढ़ खंड विभाग के बचाव एवं कटानरोधी कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि कटान प्रभावित स्थानों पर विशेष निगरानी और बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों को सुरक्षित जगहों पर शरण लेने की अपील की है। सिरौली में भी तहसील और नगर पंचायत प्रशासन रामगंगा का जलस्तर बढ़ने पर सतर्क है। ईओ राजन नाथ तिवारी ने बताया कि धर्मशालाओं में बिजली, पानी व रहन-सहन की व्यवस्थाएं कराई जा रही हैं। बहगुल, कुल्ली, भाखड़ा, दिजोड़ा और डोहड़ा नदियों का जलस्तर भी बढ़ रहा है। बाढ़ और कटान की आशंका में किसानों की चिंता बढ़ गई है। 2011 में बहगुल नदी के कटान से सुल्तानपुर गांव के 75 मकान बह गए थे। एसडीएम मीरगंज के मुताबिक, राजस्व टीमों को निगरानी के निर्देश दिए हैं। क्षेत्र में 14 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं। लोगों से नदी किनारे न जाने की अपील की गई है।
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रामगंगा में 100 बीघा से अधिक जमीन फसल सहित समाई
अलीगंज। रामगंगा नदी के बढ़ते जलस्तर और तेज कटान से सदर तहसील के धनेती खरगपुर गांव में 100 बीघा से अधिक उपजाऊ जमीन फसल समेत नदी में समा गई। इससे प्रभावित किसानों को आर्थिक नुकसान हुआ है। किसानों ने बताया कि लल्लू सिंह की 17 बीघा जमीन में से 15 बीघा कट गई। सुरेंद्र हुड्डा की 66 बीघा जमीन का आधा हिस्सा अमरूद बाग व धान की फसल समेत बह गया। पप्पू की 30 बीघा धान की फसल में से दो बीघा जमीन कटी, शेष भी खतरे में है। अमरपाल, ताराचंद, मेहताब और आनंद कुमार की कुल 82 बीघा बाजरा फसल भी नदी में समा गई। इसकी सूचना सूदनपुर, रोहतापुर सहित तीन बाढ़ खंड चौकियां बनने की सूचना दी। बाढ़ खंड विभाग के एसडीओ राहुल कुमार ने बताया कि रामगंगा का जलस्तर बुधवार सुबह 160.190 और शाम 160.230 गेज मीटर दर्ज हुआ। नदी का जलस्तर अभी दो-तीन दिन तक और बढ़ने की संभावना है। संवाद
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गौला बैराज से पानी छोड़ने से किच्छा नदी उफनाई
बहेड़ी/शेरगढ़। गौला बैराज से मंगलवार रात 27 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद किच्छा नदी उफाना गई। इससे मेगा फूड पार्क सहित हरहरपुर, नारायण नगला और राजपुरा गांवों में बाढ़ का पानी भर गया। अचानक जलस्तर बढ़ने से देर रात अफरा-तफरी मच गई। सूचना पर एसडीएम गोपाल शर्मा राजस्व टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने पूरी रात प्रभावित गांवों में गश्त कर स्थिति की निगरानी की। उनके मुताबिक, प्रशासन ने नदी किनारे के गांवों में मुनादी कराकर लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। रात 2:30 बजे के बाद पानी का स्तर कम होने लगा। बुधवार सुबह तक स्थिति सामान्य हो गई। प्रशासन ने ग्रामीणों को नदी किनारे न जाने की चेतावनी दी है। संवाद
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पश्चिमी बहगुल पर पक्का बांध बनवाने की मांग
मीरगंज। पश्चिमी बहगुल नदी पर पक्का बांध/रेगुलेटर निर्माण में लगातार देरी से किसानों में नाराजगी है। सरकार की घोषणा और 56 करोड़ रुपये की संस्तुति के बावजूद काम शुरू नहीं हुआ है। किसान कल्याण समिति ने इस वर्ष भी किसानों के खेतों की सिंचाई के लिए कच्चा बांध बनाने का निर्णय किया है। समिति अध्यक्ष जयदीप सिंह बरार ने बताया कि समिति अधिशासी अभियंता, रोहिलखंड नहर खंड बरेली और डीएम को अनुमति के लिए प्रार्थना पत्र देगी। जयदीप सिंह बरार 2016 से अपने खर्चे पर कच्चा बांध बनवाकर सिंचाई में सहयोग कर रहे हैं। पक्के बांध की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। अंग्रेजी शासनकाल में खमरिया में बना पक्का बांध 1926 की बाढ़ में बह गया था। पक्का बांध बनने से किसानों को स्थायी और सस्ता सिंचाई पानी मिलेगा। संवाद इसमें एसडीएम का वर्जन चाहिए।
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नदियों का जलस्तर बढ़ने से प्रशासन सतर्कनवाबगंज। पनघैली, अफसरा, सिंघईया और देवहा नदियों का मंगलवार रात जलस्तर बढ़ गया। तब से लगातार बढ़ोतरी पर है। इससे ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। पनघैली कई मकानों को छूती हुई बह रही है। एसडीएम सचिन कुमार यादव ने ग्रामीणों को नदी-नालों की ओर जाने पर रोक लगाई है। उन्होंने बताया कि लोगों से सुरक्षित जगहों पर शरण लेने की अपील की गई है। बाढ़ चौकियों को सतर्क कर दिया गया है। प्रशासन नदियों के बढ़ते जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए है। संवाद
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वर्जन
सदर तहसील के गांवों और कपूरपुर में टीमें बचाव कार्य कर रही हैं। कपूरपुर में गंगा मंदिर को बचाने की कवायद है। अन्य स्थानों पर उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार कार्य कराए जाएंगे। - नीरज लांबा, अधिशासी अभियंता, बाढ़ खंड
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