बरेली। जिले में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर सवारी ढोने की मनाही कागजों तक सिमटी है। सख्ती के नाम पर रस्म अदायगी हो रही है। ऐसे में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में धड़ल्ले से सवारियां ढोई जा रही हैं। गांवों से लेकर शहर तक इन्हें महिलाओं व बच्चों को बैठाकर फर्राटा भरते देखा जा सकता है। यातायात विभाग ने इनके खिलाफ पिछले दिनों में कोई अभियान नहीं चलाया। वहीं परिवहन विभाग के अधिकारियों ने एक साल में महज 41 ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को सीजकर 59 चालान किए हैं।
कासगंज में हादसे के बाद अमर उजाला टीम ने शहर में विभिन्न स्थानों का जायजा लिया तो कई जगह बेपरवाह होकर ट्रैक्टर-टॉली दौड़ती मिलीं। यह स्थिति शहर में ही नहीं देहात क्षेत्र तक है। आज भी किसी समारोह या कार्यक्रम में आसपास के गांव तक जाने के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली का इस्तेमाल लोग करते हैं। वर्ष 2022 में कानपुर में हुए हादसे में कई लोगों की जान जाने के बाद ट्रैक्टर-ट्रॉली पर सवारियां ढोने पर रोक लगाई गई थी, लेकिन कोई सख्ती नहीं होती। ऐसे में जब कभी हादसा होता है तो लोगों की जान पर बन आती है। बीते साल बरेली मंडल में कई जगह हादसे हुए हैं। तीन माह पूर्व पीलीभीत के जहानाबाद क्षेत्र में बरात ले जाते समय ट्रैक्टर-ट्रॉली नदी में गिर गई थी। गनीमत रही कि नदी सूखी थी और बड़ा हादसा टल गया। मंडल में चारों जिलों में इस तरह के हादसे आए दिन होते रहते हैं।
देहात में मेले, शादी-समारोह व अंतिम संस्कार में हो रहा इस्तेमाल
खुद परिवहन विभाग के अधिकारियों की मानें तो गांव-देहात में लोग आज भी शादी समारोह, मुंडन संस्कार कार्यक्रम व अंतिम संस्कार आदि में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से ही आते-जाते हैं। गंगा व गांव के आसपास लगने वाले मेलों में भी ऐसे ही आवागमन होता है। इस बात का भी ध्यान नहीं रखा जाता कि कम से कम लोगों को बैठाएं। ट्रैक्टर-ट्रॉली में 25 से 30 लोग तक बैठा दिए जाते हैं। ऐसे में चालक की जरा सी गलती से ट्रॉली में बैठी सवारियों की जान खतरे में पड़ जाती है।
वर्जन
समय-समय पर की जा रही कार्रवाई
ट्रैक्टर-टॉलियों पर सवारियां ढोने या लोगों को बैठाकर ले जाने पर प्रतिबंध है। मना करने पर कई बार तो लोग लड़ने पर आमादा हो जाते हैं। इसके बाद भी मंडल में समय-समय पर अभियान चलाकर चालान, सीज करने व जुर्माना वसूलने की कार्रवाई की जा रही है। -दिनेश कुमार, आरटीओ प्रर्वतन
-
फिलहाल नहीं चला कोई अभियान
एसपी ट्रैफिक शिवराज ने बताया कि गन्ने से भरीं ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में ओवरलोड व रिफ्लेक्टर आदि को लेकर तो अभियान चलाया जाता है, लेकिन कई बार किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर ग्रामीणों व महिलाओं को लेकर जाते हैं। इन लोगों के खिलाफ फिलहाल कोई अभियान नहीं चलाया गया है। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर ग्रामीणों को बैठाकर न चला जाए, इसको लेकर किसानों को जागरूक किया जाएगा।