बरेली। समय पर टीकाकरण और जागरूकता अभियानों से रेबीज और लंपी स्किन डिजीज जैसे पशुजनित रोगों पर नियंत्रण के संकेत हैं, लेकिन कुत्तों, बंदर, बिल्ली और अन्य पशुओं के बढ़ते हमले से एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) क्लीनिक में हर साल घायलों की संख्या बढ़ रही है।
जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. प्रशांत रंजन के मुताबिक रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम के तहत इस वर्ष अब तक मौत का आंकड़ा शून्य है। पिछले चार-चार वर्षों में रेबीज से 10 लोगों की मौत हो चुकी है। समय पर घाव की सफाई और एआरवी के साथ जरूरत के मुताबिक रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन दिए जाने से संक्रमण को रोकने में मदद मिलती है। कोल्ड चेन पॉइंट वाली यूपीएचसी और सीएचसी पर भी एआरवी लगने से संक्रमण फैलने की आशंका कम रहती है। हालांकि, पशुओं के काटने और खरोंच के मामले बढ़ रहे हैं।
नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार शहर में करीब 35 हजार लावारिस कुत्ते हैं। इन्हें पकड़ने और बंध्याकरण के लिए सालाना करीब एक करोड़ रुपये खर्च की व्यवस्था है। नंदोसी में एबीसी सेंटर बना, पर संचालक एजेंसी का चयन अटका है। बंदर पकड़ने का वर्क ऑर्डर भी जारी नहीं हुआ है।
पशुपालन विभाग के अनुसार वर्ष 2023 के बाद जिले में गोवंश में लंपी स्किन डिजीज का कोई मामला सामने नहीं आया है। इस वर्ष 1.47 लाख गोवंश टीकाकरण लक्ष्य के सापेक्ष 89,500 पशु प्रतिरक्षित हुए। बर्ड फ्लू का कोई मामला सामने नहीं आया। उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. ओपी मौर्य के अनुसार जिले में करीब छह लाख गाय-भैंस हैं। इनमें करीब 54 हजार का बधियाकरण कराया जा चुका है।
बच्चियों पर कुत्ते के हमले से मौत, टूटे परिवार
लटूरी गांव में 16 अगस्त को के इसहाक खान की छह वर्षीय बेटी इनाया गांव के बाहर बच्चों के साथ खेल रही थी। कुत्ते ने बच्ची पर हमला कर करीब 100 मीटर तक घसीटा। इससे मौत हो गई। तीन महीने पहले इनकी छोटी बेटी आयत पर भी कुत्तों ने हमला किया था। पूर्व में टियूलिया के अवधेश कुमार की बच्ची भी कुत्ते के हमले में जख्मी हुई और मौत हो गई। परिजन का आरोप है कि शिकायत के बाद नगर निगम की टीम कुत्तों को पकड़ने पहुंची, लेकिन बिना कार्रवाई लौट गई।