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फर्जी खाते खोलकर की गई धान की खरीद

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तिलहर। शासन के निर्देश पर हुई प्रशासनिक जांच में धान की सरकारी खरीद मेें घोटाला तो उजागर हुआ लेकिन घोटाले के इस खेल के बड़े खिलाड़ियों तक हाथ नहीं पहुंचे। केंद्र प्रभारियों के खिलाफ तो रिपोर्ट दर्ज हो र्गई पर एक ही नाम से कई बैंकों में खाते खोलकर समर्थन मूल्य हड़पने वाले माफिया पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। माफिया ने कुछ राइस मिलों पर किसानों से सीधे खरीदे गए धान की आवक सेंटरों पर दर्ज करा दी। यही नहीं, किसानों का लाभांश हड़पने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाए, जिनका परत दर परत खुलासा होना बाकी है।
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प्रभारी जिला खाद्य विपणन अधिकारी अभिलाष चंद्र सागरवाल ने शुक्रवार को पांच क्रय केंद्रों के चार सेंटर इंचार्ज के खिलाफ अलग-अलग थानों में गंभीर आरोपों में एफआईआर दर्ज कराई थी। उन्होंने तिलहर मंडी के एसएससी केंद्र प्रभारी रोहिताश कुमार के खिलाफ धान क्रय नीति का उल्लंघन करने के मामले में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए माफिया की कारगुजारी का विस्तृत उल्लेख किया है। उन्होंने एफआईआर में कहा है कि तिलहर मंडी के एसएससी केंद्र पर 30867.40 क्विंटल धान की खरीद 350 किसानों के माध्यम से दर्शायी है और उनमें 12 ऐसे व्यक्ति दर्ज पाए गए, जिनके नाम से अलग-अलग बैंकों में कई कई खाते खोलकर उसमें खरीदे गए धान की रकम जमा दर्शाकर लाखों का घोटाला किया गया।
इस तरह धान खरीद में की गई गड़बड़ी
अलग-अलग बैंकों में खोले कई एकाउंट
किसी व्यक्ति के पास दस बीघा जमीन है। उसके नाम से अलग-अलग बैंकों में कई एकाउंट खोल दिए गए। सूत्र बताते हैं कि दस बीघा जमीन पर किसान लगभग दस क्विंटल धान बेच सकते हैं, लेकिन माफिया ने एक नाम से अलग-अलग बैंकों में कई खाते खोलकर सौ-सौ क्विंटल धान की बिक्री दर्शा दी। बाद में खाताधारक को दस से 20 रुपये क्विंटल की दर से रकम देकर संतुष्ट कर दिया और शेष रकम की बंदरबांट हो गई।
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कंप्यूटर ऑपरेटरों से कराए फर्जी रजिस्ट्रेशन
माफिया ने नगर के कुछ कंप्यूटर ऑपरेटरों को भी अपने मकड़जाल में फंसाया और उन्हें लालच देकर घोटाले को अंजाम दिया। सूत्रों के अनुसार नगर के मोहल्ला मौजमपुर और सिंह कॉलोनी में दो कंप्यूटर ऑपरेटरों के माध्यम से किसानों का फर्जी रजिस्ट्रेशन 100-100 रुपये देकर करा लिया गया। बाद में फर्जी कागजातों के माध्यम से रजिस्टर्ड किसानों के नाम पर लाखों रुपये की धान खरीद कर ली।
धान खरीद में अनियमितताओं की जांच अभी जारी है। क्रय केंद्रों के अभिलेखों में गड़बड़ी के लिए प्रथम दृष्टया केंद्र प्रभारी जिम्मेदार होते हैं, लेकिन उनके स्तर से खरीद के दौरान कोई शिकायत नहीं मिलने पर उन्हें दोषी मानते हुए एफआईआर कराई गई है। पुलिस की विवेचना में अन्य घोटालेबाज भी पकड़ में आ सकते हैं। - अभिलाष चंद्र सागरवाल, प्रभारी जिला खाद्य विपणन अधिकारी
गरीबों लालच देकर जनधन खातों में जमा कराई रकम
माफिया ने जनधन के जीरो बैलेंस से खुले खातों में गरीब तबके के संबंधित लोगों से मिलकर उन्हें कुछ रकम का लालच दिया और उनके खातों पर लाखों रुपये के धान की खरीद कर दी। बाद मेें इस रकम का भी बंदरबांट कर लिया गया।
सीएए के विरोध में इंटरनेट बंद होने पर किया खेल
जांच में एक चौंकाने वाला बड़ा खुलासा यह हुआ है कि अभी हाल ही में सीएए को लेकर हल्ला-गुल्ला होने के दौरान प्रशासन ने जनपद में मोबाइल की नेटवर्किंग बंद कर दी थी और इस दौरान माफिया ने खरीद में बड़ा खेल कर लिया। सूत्र बताते हैं कि मंडी स्थित आरएफसी प्रथम और एसएफसी केंद्र पर नेट बंद होने के बावजूद 72 हजार क्विंटल खरीद पाई गई। डिप्टी आरएमओ भी मानते हैं कि नेट बंद होने के कारण माफिया उत्तराखंड चले गए और वहां से उन्होंने दोनों सेंटरों पर ऑनलाइन खरीद दर्ज करा कर घोटाला कर लिया।
12 व्यक्तियों के नाम दर्शाई गई लाखों की खरीद
माफिया ने 12 व्यक्तियों के नाम दर्शाकर धान खरीद में लाखों का घोटाला किया। इन नामों की सूची डिप्टी आरएमओ ने पुलिस को भी उपलब्ध कराई है, जबकि संबंधितों का कहना है कि उन्होंने इतना धान बेचा ही नहीं है।
0 वीरेंद्र के नाम से कई खाते खोलकर छह बार धान बेचा गया।
0 संदीप के नाम से कई खाते खोलकर पांच बार धान बेचा गया।
0 रामपाल के नाम से कई खाते खोलकर पांच बार धान बेचा गया।
0 सुरेश के नाम से कई खाते खोलकर सात बार धान बेचा गया।
0 अखिलेश के नाम से एक खाते से सात बार धान बेचा गया।
0 अवधेश के नाम से दो खातों से पांच बार धान बेचा गया।
0 प्रमोद के नाम से दो खाते से पांच बार धान बेचा गया।
0 प्रदीप के नाम से कई बैंकों मेें खाते खोलकर सात बार धान बेचा गया।
0 रूसी के नाम से तीन खाते खोलकर पांच बार धान बेचा गया।
0 राम सिंह के नाम से तीन खातों में पांच बार धान बेचा गया।
घोटाले में कई राइस मिलर्स भी शामिल
धान खरीद घोटाले में नगर के कुछ चुनिंदा राइस मिलर्स भी शामिल बताए जाते हैं। इन राइस मिलों पर किसानों से धान की खरीद की गई और बाद में उसे क्रय केंद्रों पर समायोजित कर दिया गया। यही नहीं, कुछ फर्जी समितियां भी बनाई गई, लेकिन अधिकारियों ने उन पर इसलिए हाथ डालना उचित नहीं समझा क्योंकि यह सत्ता पक्ष से जुड़े रसूखदार लोग हैं। पुवायां-खुटार रोड पर स्थित पंजाब के एक सियासी परिवार की राइस मिल के संचालक कई फर्जी समितियां बनाकर लाखों का घोटाला किया, लेकिन उसका बाल बांका तक नहीं हुआ।
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