गणतंत्र दिवस का दिन किया तय, सामान्य वर्ग के कई अधिवक्ता भी समर्थन में उतरे
बरेली। सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे के कई रणनीतिक और राजनीतिक मायने भी हैं। हालांकि, इस्तीफे के पीछे प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्यों की पिटाई और यूजीसी के मुद्दे से जोड़कर भावनात्मक रूप देने की कोशिश की गई है। चार दिन पहले ही इस्तीफे की पटकथा लिख ली गई थी। दिन भी गणतंत्र दिवस का तय किया गया। सोमवार को ही बरेली बार एसोसिएशन की नई कार्यकारिणी ने शपथ ली और इसके बाद अलंकार ने इस्तीफा दे दिया।
सोमवार को डीएम आवास पर हुए घटनाक्रम से लेकर मंगलवार को हाईवोल्टेज ड्रामा के दौरान बरेली बार एसोसिएशन के सचिव दीपक पांडेय पल-पल अलंकार अग्निहोत्री के साथ रहे। उन्होंने जब-जब मीडिया से बात की तो लगभग हर बार दीपक पांडेय का नाम लिया। इसको लेकर कई कयास भी लगाए जा रहे हैं। दरअसल, इस्तीफे को लेकर अलंकार और दीपक के अलावा तीसरे व्यक्ति को मालूम नहीं था। सोमवार को अलंकार अग्निहोत्री गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल हुए और दीपक पांडेय ने फिर से बरेली बार के सचिव के रूप में शपथ ग्रहण की। अलंकार अग्निहोत्री जब डीएम से मिलने उनके आवास पर गए तब दीपक उनके साथ थे। डीएम आवास पर बंधक बनाने की बात अलंकार ने सबसे पहले बार के सचिव को ही बताई। सूत्रों ने बताया कि 23 जनवरी वसंत पंचमी के दिन तय हो गया था कि गणतंत्र दिवस पर अलंकार इस्तीफा देंगे।
सचिव दीपक पांडेय ने बताया कि यूजीसी के नियमों में किया गया बदलाव समस्त सवर्ण समाज के खिलाफ है। अलंकार से उनके व्यक्तिगत संबंध हैं। उनका इस्तीफा भावनात्मक है, ताकि समाज को संदेश जाए और गलत नीतियों के विरोध में समाज एकजुटता दिखाए। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज को लेकर जिस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया गया वह निंदनीय है। संवाद
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शायराना अंदाज में इस तरह ली व्यवस्था पर चुटकी
- बरेली बार एसोसिएशन के प्रबंध कार्यकारिणी के कनिष्ठ सदस्य मध्यम सक्सेना ने शायराना अंदाज में व्यवस्था पर चुटकी ली तो डीएम कार्यालय तालियों से गूंज उठा। उन्होंने कहा कि कुर्सी है तुम्हारा जनाजा तो नहीं है, कुछ कर नहीं सकते तो उतर क्यों नहीं जाते। उन्होंने अलंकार का समर्थन करते हुए कहा कि हाकिम मेरे खिलाफ सिपाही मेरे खिलाफ, मिलती नहीं है फिर भी गवाही मेरे खिलाफ।