बरेली। अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ 1857 के विद्रोह में अहम भूमिका निभाने वाले आला हजरत के वालिद हजरत नकी अली खां का 141वां उर्स मनाया गया। इस दो रोजा उर्स के दौरान उलमा की तकरीर और नातो मनकबत की महफिल सजाई गई। इस मौके उर्स की तमाम तकरीब दरगाह आला हजरत सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा खां कादरी की सरपरस्ती में सपन्न हुई। शाम को कुल की रस्म के बाद अम्नो अमान और मुल्क की खुशहाली के लिए दुआ करते हुए मुफ्ती अहसन मियां ने कहा कि हम हिंदुस्तानी हैं हमें आपस में इत्तेहाद रखना चाहिए। पहले रोज उर्स की शुरूआत सुबह कुरान ख्वान से हुई। इसके बाद रात में जलसा आयोजित किया गया। इसमें मुफ्ती याकूब सहित तमाम उलमा ने हजरत नकी अली खां की जिंदगी पर रोशनी डालते हुए उनकी दीनी खिदमात के साथ ही जंगे आजादी में उनके योगदान का विस्तार से उल्लेख किया। दूसरे रोज शनिवार को दोपहर में जलसा आयोजित किया गया। इसमें मुफ्ती फुरकान ने तकरीर की। जलसे के बाद शाम को 4:30 बजे कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। इसमें बड़ी तादाद में लोगों की शिरकत रही। इस दौरान मुफ्ती कारी बशीरुल कादरी, अख्तरुल कादरी, मुफ्ती जुल्फिकार, मुफ्ती आफाक, मुफ्ती सना उल्लाह आदि मौजूद रहे।