बरेली। सूर्य प्रधान उत्तरा आषाढ़ नक्षत्र, वज्र और विष कुंभ योग के साथ 17 जुलाई को सावन माह की शुरुआत हो रही है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक वर्षों बाद बन रहे दुर्लभ संयोग के प्रभाव से अबकी बार सावन माह में शिव महाकाल स्वरूप में विराजमान रहेंगे। इस दौरान किए गए अशुभ कार्य पर महाकाल का रौद्र रूप दिखाई देने की संभावना है। उन्होंने जातकों को विधि विधान और शांतिपूर्ण तरीके से सावन माह में शिव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने का आह्वान किया है।
ज्योतिषाचार्य पं. विकास उपाध्याय के मुताबिक सावन माह के अलावा अन्य किसी तिथि में वज्र या विष योग का संयोग अशुभ माना जाता है। लेकिन शिव के पावन आराधना के दौरान इस संयोग का प्रभाव बदल जाता है। शिव भक्तों की रक्षा के लिए वज्र और विष योगों के अशुभ प्रभावों को ग्रहण कर लेते हैं। भगवान शिव भोलेनाथ के बजाय महाकाल का रौद्ररूप धारण का भक्तों की रक्षा करते हैं। मान्यता है कि जब भगवान शिव ने विषपान किया और भक्तों की रक्षा के लिए जब-जब महाकाल स्वरूप धारण किया, तब यही योग बने। सावन की शुरुआत पर बन रहे इन योगों का प्रभाव सावन माह तक रहेगा।
हरियाली अमावस्या पर पंच महायोग
एक अगस्त को हरियाली अमावस्या पर पंच महायोग का संयोग बन रहा है। ज्योतिषियों का दावा है कि ये संयोग करीब 125 साल के बाद आ रहा है। पहला सिद्धि योग, दूसरा शुभ योग, तीसरा गुरु पुष्यामृत योग, चौथा सर्वार्थ सिद्धि योग और पांचवां अमृत सिद्धि योग का संयोग है। पंच महायोग के संयोग में कुल देवी-देवता और मां पार्वती की पूजा से मनोकामना पूरी होती है। प्रकृति के हरे भरे रहने की संभावना है।
तीसरे सोमवार के दिन है नागपंचमी
पांच अगस्त को नागपंचमी का दिन भी भगवान शिव के विशेष दिन सोमवार को है। सोमवार और नागपंचमी दोनों ही दिन भगवान शिव की आराधना की जाती है। ज्योतिषाचार्य पं. नीरज शर्मा के मुताबिक नागपंचमी के दिन चंद्र प्रधान हस्त नक्षत्र और त्रियोग का संयोग भी बन रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग, सिद्धि योग और रवि योग यानी त्रियोग के संयोग में काल सर्प दोष निवारण की पूजा करना शुभ होने की संभावना है।
महत्वपूर्ण तिथियां
17 जुलाई सावन माह का पहला दिन
22 जुलाई सावन का पहला सोमवार
29 जुलाई सावन का दूसरा सोमवार
05 अगस्त सावन का तीसरा सोमवार
12 अगस्त सावन का चौथा सोमवार
15 अगस्त सावन माह का अंतिम दिन