13 दिसंबर को शुरू हुआ यह योग 24 जनवरी तक चलेगा, एक-एक कर चार ग्रह होंगे अस्त
बरेली। कुंडली में पांच भावों के कारक और ज्ञान, बुद्धि और चरित्र के देवता बृहस्पति के अपनी ही धनु राशि में अस्त होने के साथ 13 दिसंबर से सप्तग्रही योग शुरू हो गया है जो 24 जनवरी यानी 44 दिनों तक चलेगा। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक इन 44 दिनों में लगातार खगोलीय परिवर्तन होंगे, जिनका उथल-पुथल के तौर पर देश भर में असर दिखेगा। 10 जनवरी को दोबारा उदय होने के बाद गुरु जातकों को उनकी गलतियों के लिए दंडित करेंगे।
ज्योतिष में सप्तग्रही योग को तांडव का भी संकेत माना जाता है। इस योग में काफी तेजी से खगोलीय घटनाएं घटित होती हैं। 13 दिसंबर को बृहस्पति के अपनी ही राशि धनु में अस्त होने के बाद 15 दिसंबर को बुध भी अस्त हो गए हैं। इसी दिन इस वर्ष का अंतिम रविपुष्य योग बना। 16 दिसंबर को सूर्य देव के धनु राशि में प्रवेश करने के साथ खरमास शुरू हो गया। 25 दिसंबर को चंद्र और बुध ने भी धनु राशि में प्रवेश कर लिया। 25 और 26 को धनु राशि में छह ग्रह विद्यमान रहने और सामने मिथुन राशि में राहू के विराजमान होने से सप्तग्रही योग बन गया। धनु राशि में केतु और शनि को छोड़कर चार ग्रह अस्त हो गए हैं। इसी बीच सूर्य ग्रहण भी हुआ है।
ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ शंखधार के अनुसार सप्तग्रही योग में होने वाली खगोलीय घटनाओं का देश भर में असर दिखाई देगा। धनु राशि पूर्व की राशि है इसलिए पूर्वांचल में इसका विशेष प्रभाव रहेगा और मिथुन पश्चिम की राशि है इसलिए पश्चिम में प्राकृतिक दुर्घटनाएं हो सकती हैं। इसी बीच 27 दिसंबर को न्याय के देवता शनि भी अस्त हो जाएंगे।10 जनवरी को गुरुदेव उदित होंगे और फिर अपने अस्त रहने की अवधि में की गई चूकों और गलतियों की सजा जातकों को देगे। 15 जनवरी को सूर्य धनु से मकर में प्रवेश करके उत्तरायण हो जाएंगे। इस दिन मकर संक्रांति मनाई जाएगी। 24 जनवरी को शनि देव स्वराशि मकर में प्रवेश करेंगे। इसी दिन से गुरु और शनि स्वराशि में रहेंगे। राहु-केतु 23 जनवरी को अपनी उच्च राशि मिथुन में रहेंगे। यह समय देश के उत्कर्ष का होगा।