अलर्ट के चलते पुलिसकर्मियों को नहीं मिल रही छुट्टियां, अफसर टाल रहे
खुफिया अमले की रिपोर्ट में दावा, सूझबूझ से गुजर चुका है तनाव का दौर
बरेली। नागरिकता कानून के विरोध के चलते पुलिस-प्रशासन अलर्ट है। हालांकि अपने शहर में तनाव जैसी कोई बात नहीं है। फिर भी एहतियातन पुलिस कर्मियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई है और इस शुक्रवार भी विशेष निगरानी की हिदायत दी गई है।
देश भर में सीएए के खिलाफ हो रहे हिंसक प्रदर्शन के मद्देनजर बरेली शहर और मंडल को काफी संवेदनशील माना जा रहा है। कई एजेंसियां खुराफातियों की निगरानी कर रही हैं। हालांकि सूझबूझ के चलते तनाव का वक्त टल गया। अधिकांश शहरों में रोकने की कोशिश पर भीड़ बेकाबू हुई थी लेकिन यहां लोगों को घरों से निकलने से नहीं रोका गया। अफसर मंच पर ज्ञापन लेने भी पहुंच गए। खुफिया अमले की मानें तो इसी तालमेल की वजह से तनाव का वक्त गुजर गया और आगे भी टकराव की गुंजाइश नहीं है। हालांकि पूरे मंडल में कुछ नेता और शरारती तत्वों को चिह्नित कर उनकी निगरानी जरूर की जा रही है। साथ ही अफसर साल के अंतिम शुक्रवार को लेकर अलर्ट हैं। पुलिस मुख्यालय से भी इसे गंभीरता से लेने के आदेश दिए गए हैं। लिहाजा इस बार भी जुमा की नमाज के वक्त पुलिस धर्मस्थलों के पास और घनी बस्तियों में सक्रिय रहेगी। इसके चलते ही कैजुअल लीव (सीएल) मांग रहे पुलिसकर्मियों को शुक्रवार के बाद छुट्टी लेने को कहा गया है।
बरेली मंडल में पूरी तरह शांति है। बुधवार को मैंने बिजनौर जाकर हालात का जायजा लिया। शासन स्तर से सीएए को लेकर स्पष्ट नीति जारी हुई है, जिसके हिसाब से अल्पसंख्यकों समेत मौजूदा भारतीयों को यह किसी तरह प्रभावित नहीं करेगा। लोगों को बिना जाने समझे विरोध छोड़कर सही स्थिति जाननी चाहिए। सभी एसपी को शांति समिति की बैठकें करके लोगों का भ्रम दूर करने के निर्देश दिए हैं, इस शुक्रवार भी पुलिस पूरी तरह अलर्ट रहेगी।
- अविनाश चंद्र, एडीजी, बरेली जोन