बरेली। दरगाह आले रसूल खानकाह वामिकिया में आले रसूल के उर्स का आगाज परचम कुशाई की रस्म से हुआ। तीन दिनों तक चलने वाले इस उर्स में शामिल होने के लिए जायरीन की आमद जारी है।
खानकाह में 74वें सालाना उर्स की तकरीब सुबह कुरान ख्वानी से शुरू हुई। नातो मनकबत की महफिल के बाद सलातो सलाम का नजराना पेश किया गया। दोपहर में पीरे तरीकत नायब सज्जादा मौलाना सय्यद असलम मियां वामिकी की कयादत में परचम व चादरों का जुलूस अहमद अली तालाब से निकाला गया। यहां से असलम मियां ने निराले वामिकी को परचम सौंप कर जुलूस रवाना किया। जो अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ शाह दाना रोड स्थित खानकाह पहुंचा। जहां सज्जादानसीन अल्हाज सैय्यद मोहम्मद मियां वामिकी ने परचम कुशाई की रस्म अदा की। रात को महफिले समा सजाई गई। इसमें नामचीन कव्वालों ने कलाम पेश किए। इस दौरान महबूबे इलाही हजरत निजामउद्दीन औलिया की सत्राहवीं मनाते हुए कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। दुआ नायब सज्जादा असलम मियां ने की।
वहीं जुलूस का अकीदतमंदों ने जगह जगह इस्तकबाल किया। आजम नगर में कफील कुरैशी, अकरम कुरैशी, फरहान चिश्ती, जावेद कुरैशी, खुर्शीदुल हसन, साजिद कुरैशी, बांस मंडी में तमाम दुकानदारों ने इस्तकबाल करते हुए दस्तारबंदी की। साहूगोपी नाथ स्कूल मार्केट पर इस्तकबाल में लंगर किया गया।