बरेली। श्रीश्रीश्री 1008 महामंडलेश्वर स्वामी संतोषी माता ने कहा कि भगवान सतयुग में ध्यान, त्रेता युग में पूजा और द्वापर में सेवा से मिलते हैं। उन्होंने कहा कि हर युग में भगवान ने दुष्टों का संहार किया है। हरि मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर उन्होंने कहा कि कलयुग में सब साधनों में सहज उपलब्ध साधन भगवान का स्मरण है, जिसके नाम से ही भक्ति मिलती है। राम नाम का जप करना यज्ञ के समान है। भगवान ने गीता में कहा है कि यज्ञा नाम जपसमिं। रामायण में लिखा है कि केवल कलयुग में राम नाम का आधार भगवान है। ऐसा समझकर हमें जप करना चाहिए। यजमान सचिन भसीन ने बताया कि मंगलवार को श्रीमद्भागवत कथा का समापन हो गया।