बरेली। सहसवानी टोला स्थित इमाम बारगाह-ए सैय्यद अनवर हुसैन में पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद मुस्तफा की यौमे विलादत पर सैय्यद बिलाल नकवी की ओर से तरही नातिया महफिल आयोजित की गई। इसका उनवान जश्ने सरताज-ए-बशरियत रहा।
इस मौके पर सदारत शिया आसफी जामा मस्जिद के इमामे जुमा मौलाना शम्सुल हसन खां ने तिलावते कुरान व दुआ-ए-नुदबा पढ़ कर महफिल की शुरुआत की। साथ ही मोहम्मद साहब की सीरत व तालीम पर रोशनी डाली। इसके बाद शेर-ओ-शायरी का दौर शुरू हुआ। इसमें शाद फरुखाबादी ने अपने कलाम में कहा - ‘मौलाए कायनात का बाबा रसूल से, करता है प्यार हद से ज्यादा रसूल से। कुरां के साथ वारिसे कुराआं भी दिया, क्या और चाहता है जमाना रसूल से।’ अदील जाफरी ने कहा- अखलाक मिल रहा है अनोखा रसूल से। दुश्मन को भी नहीं कोई खतरा रसूल से।। रिजवान बरेलवी ने पढ़ा कि- कुरान में ये हुक्म खुदा का हमें मिला, आगे बढ़े न कदम तुम्हारा रसूल से। इसी तरह हुनर फर्रुखाबादी सहित तमाम दूर दराज शहरों से आए शायरों ने कलाम पेश किया। आखिर में यूनाइटेड शिया मूवमेंट के महासचिव कलीम हैदर नकवी सैफी ने शुक्रिया अदा किया।