बरेली। संपूर्ण ब्रह्मांड में देव गुरु बृहस्पति को सर्वाधिक शुभग्रह माना जाता है। इनका राशि परिवर्तन अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय मुद्दों को प्रभावित करता है। वृश्चिक राशि के बाद 4/5 नवंबर की रात 12:03 पर देवगुरु स्वयं की मूल त्रिकोण राशि धनु में प्रवेश करेंगे। देवगुरु लगभग 12 वर्षों के बाद धनु राशि में प्रवेश कर रहे हैं। खास बात यह है धनु राशि में शनि और केतु पहले विराजमान है। धनु राशि में गुरु, शनि, केतु का मिलन 297 वर्षों के बाद हो रहा है। इससे पहले यह मिलन इसी राशि में 1722 ईसवी में हुआ था।
ज्योतिष शास्त्र में इस घटना को बड़ा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। क्योंकि गुरु शनि केतु का मिलन कई शुभ कई अशुभ संकेत भी दे रहा है। जिसका सभी 12 राशियों पर व्यापक प्रभाव भी पड़ेगा। गुरु के कालखंड में वक्त्रस्ी तथा मार्गी गति के कारण सोना, तांबा, सरसों और सोयाबीन में तेजी मंदी का वातावरण रहेगा। देश में कई महत्वपूर्ण निर्णय भी होंगे। पुराने धार्मिक में विवाद भी सुलझेंगे। भारत के पड़ोसी देशों के साथ युद्ध जैसे हालात फिर से बनते हुए दिखाई दे रहे हैं।
राशियों पर असर
मेष- यदि आप बेरोजगार हैं तो रोजगार मिल सकता है। पद प्रतिष्ठा में वृद्धि करने वाला होगा।
वृष- गुप्त शत्रु तनाव देंगे, रुपये के लेन देन में सावधानी रखें, भ्रम के कारण अपनों से पीड़ा।
मिथुन- नई नौकरी में सफलताएं, विरोधी परास्त होंगे, समय समय पर सहयोग मिलता रहेगा।
कर्क- रिश्तेदार से तनाव, गुप्त शत्रु से पीड़ा, शारीरिक कष्ट, ननिहाल पक्ष से सचेत रहें।
सिंह- बुद्धि से किया गया कार्य सफल होगा, प्रतियोगिता का परिणाम अनुकूल रहेगा, श्रम अधिक।
कन्या- पारिवारिक सदस्य से समस्या मिलेगी। आर्थिक मामलों में सुधार, पद प्रतिष्ठा में परिवर्तन।
तुला-वैभव में वृद्धि और दूसरों से सहयोग मिलेगा, धार्मिक प्रवृत्ति में वृद्धि भी कराएगा।
वृश्चिक- वाणी पर संयम रखे, रिश्तों में तनाव, व्यर्थ के कार्यों में समय नष्ट होगा।
धनु- पद और प्रतिष्ठा, सम्मान में वृद्धि, पारिवारिक दायित्व की पूर्ति में सफल होंगे, स्वास्थ्य सही रखें।
मकर- मन चिढ़ा चिढ़ा रहेगा, रिश्तों पर प्रभाव डालेगा, पारिवारिक जीवन में उतार चढ़ाव रहेगा।
कुंभ- पद-प्रतिष्ठा, यश और कीर्ति देगा, चली आ रही समस्याओं का समाधान, आर्थिक संपन्नता।
मीन- कर्मक्षेत्र में कुछ बाधाएं, स्थानांतरण, अनावश्यक यात्राएं, दूसरों के कारण तनाव मिलेगा।
‘पांच नवंबर से धनु राशि में रहने के बाद गुरुदेव 30 अप्रैल को मकर राशि में प्रवेश करेंगे। 13 मई को मकर राशि में वक्त्रस् गति से 30 जुलाई को मकर से पुन: अपनी धनु राशि में गुरु वक्त्रस्ी हो जाएंगे, जो 6 सितंबर को सीधी चाल चलकर 20 नवंबर 2020 तक धनु राशि में रहेंगे।’
मुकेश शर्मा, नव दुर्गा मंदिर रोहिली टोला