बरेली। उर्स-ए-रजवी का दूसरा दिन शबाब पर रहा। देश विदेश के जायरीन की बढ़ रही भीड़ के बीच मुफ्ती आजम हिंद और रेहाने मिल्लत के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। खास तौर से रात को हुए जलसे में भारी मजमा रहा।
उर्स स्थल इस्लामिया इंटर कालेज मैदान पर जलसा आयोजित किया गया। इसमें उलमा ने आला हजरत इमाम अहमद रजा खां फजिले बरेलवी, मुफ्ती आजम हिंद हजरत मुस्तफा रजा खां और रेहाने मिल्लत हजरत रेहान रजा खां की जिंदगी के साथ ही दीनी मामलात पर भी रोशनी डाली। इसमें खास तौर से तुर्की से आए नैसी तुर्बा ने आला हजरत के इल्म पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि अल्लाह ताला ने जो कुछ आला हजरत को अता किया वो इश्के रसूल की बुनियाद थी। इसी तरह दूसरे बड़े उलमा ने आला हजरत को इल्म का सूरज कहा और उन्हें 19वीं और 20वीं सदी का मुजद्दि बताया। जलसे दौरान रात 1:40 बजे मुफ्ती आजम हिंद के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। इसमें बाहरी जायरीन के अलावा स्थानीय अकीदतमंदों की भी शिरकत रही।
इससे पहले सुबह को रेहाने मिल्लत के कुल से पहले जलसे को तमाम उलमा ने खिताब किया। कारी अब्दुर्रहमान कादरी ने रेहने मिल्लत को खिराजे अकीदत पेश करते हुए उन्होंने कहा कि बरेली शरीफ की शक्ल में पहचान दिलाने के लिए गैर मुल्कों के दौरे किए। इसके बाद सुबह 9:58 बजे रेहानी मियां के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। जलसे में तमाम शायरों ने कलाम भी पेश किए। दरगाह प्रमुख सुब्हान रजा खां (सुब्हानी मियां) की सरपरस्ती जलसा संपन्न हुआ। सदारत करते हुए सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा खां कादरी ने दुआ की।
उर्स प्रभारी सैयद आसिफ मियां की निगरानी में हुआ। इसमें मुफ्ती सलीम नूरी, मुफ्ती निजामुद्दीन पटेल, मौलाना फैसल अहमद रजा, मौलाना कमरुज्जमा आजमी, फरोगुल कादरी (इंग्लैंड), मौलाना तहसीन रजवी फिजी (आस्ट्रेलिया), मौलाना यूनुस रजा, अब्दुल सलाम (साउथ अफ्रीका) मौलाना रफीक रजवी (मारीशस) सहित देश विदेश के उलमा की तकरीर हुई। दरगाह से जुड़े नासिर कुरैशी ने बताया कि शुक्रवार को इस्लामिया कालेज के मंच सुबह से ही तकरीरों का सिलसिला शुरू हो जाएगा। आला हजरत का कुल दोपहर 2:38 बजे होगा। इसके बाद अपरान्ह 3 बजे सज्जादानशीन अहसन मियां उर्स स्थल पर ही जुमे की नमाज अदा कराएंगे।