बरेली। करोलान की आला हजरत मस्जिद में जुमे की नमाज से पहले तीन तलाक पर तकरीर कर रहे इमाम मुफ्ती गुलाम रब्बानी को हुकूमत के साथ आईएमसी अध्यक्ष मौलाना तौकीर रजा खां को भी घेरना भारी पड़ गया। उन्होंने जब तीन तलाक कानून पर मौलाना तौकीर के सरकार का समर्थन करने पर तंज कसते हुए अफसोस जताया तो यहां मौजूद मौलाना तौकीर के समर्थकों ने विरोध शुरू कर दिया। अफरातफरी के माहौल के बीच जब एक के बाद एक तौकीर समर्थकों ने इमाम साहब को नसीहत देनी शुरू कीं तो वह यही कहकर छूटे कि उन्होंने जज्बात की रौ में आकर मौलाना तौकीर का नाम ले दिया था।
आला हजरत मस्जिद में इमाम मुफ्ती गुलाम रब्बानी ने इस जुमे को भी नमाज से पहले नमाजियों को इस्लाम और दीन के बारे में नसीहत करते हुए तकरीर की। इसी दौरान उनकी तकरीर में तलाक और तीन तलाक का जिक्र आया और उन्होंने कहा कि तीन तलाक पर कानून शरीयत में हुकूमत का दखल है। उन्होंने कहा कि हुकूमत ने इस्लामी व्यवस्था को समझे बगैर तीन तलाक पर कानून बना दिया, साथ ही इस बात पर अफसोस जताया कि आईएमसी अध्यक्ष मौलाना तौकीर रजा खां ने भी हुकूमत के फैसले का समर्थन किया। इमाम के इतना कहते ही मस्जिद मौजूद आईएमसी के पदाधिकारियों के साथ कई लोगों ने एतराज करना शुरू कर दिया।
बात यहां तक पहुंची कि तौकीर समर्थक मुनीर इदरीसी ने खुद माइक संभालकर मौलाना तौकीर का पक्ष साफ किया। उन्होंने कहा कि मौलाना तौकीर ने यह कहा था कि हुकूमत ने तीन तलाक पर कानून बना ही दिया है तो मुसलमानों को उस कानून का भी सम्मान करना चाहिए। नदीम खान ने तीन तलाक कानून पर मौलाना तौकीर के बयान को पुराना मामला बताते हुए कहा कि अब इसे मस्जिद में उठाने का क्या मतलब है। यह मुद्दा तो कानून बनने के साथ खत्म हो चुका है। उन्होंने इमाम को ही घेरते हुए कहा कि अगर एतराज करना था तो कानून बनने से पहले इमामों और खानकाहों को ही पहले आगे आना चाहिए था।
नोकझोंक और बहस के बीच मस्जिद में काफी देर अफरातफरी का माहौल बना रहा। इसी बीच इमाम ने सफाई दी कि मौलाना तौकीर का नाम वह जज्बात में आकर बोल गए थे। इस बीच नमाजियों में भी इस मुद्दे पर चर्चा शुरू हो गई। किसी तरह मामला शांत हुआ और इमाम के पीछे सभी ने जुमे की नमाज अदा की। मुफ्ती गुलाम रब्बानी ने इस मामले में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यह आपसी मामला था जो हाथ के हाथ निपट गया।