बरेली। चेहल्लुम की मजलिसों के सिलसिले में काला इमाम स्थित दरगाह हजरत अब्बास में गहवारे की जियारत कराई गई। इसे देखकर वहां मौजूद लोग रो पड़े।
दरगाह पर गुलरेज तुराबी की ओर से आशुरा आयोजित किया गया। बृहस्पतिवार को इसकी आखिरी मजलिस हुई। इस मौके पर शिया आसफी जामा मस्जिद के इमामे जुमा मौलाना शम्सुल हसन खां ने अपनी तकरीर में मसायब बयान किए। इसके बाद इमाम हुसैन के छह माह के बेटे हजरत अली असगर के गहवारे की जियारत के दौरान कदीमी नौहा पढ़ा गया। गुलरेज तुराबी ने असगर मेरे प्यारे हाय असगर मेरे प्यारे.. नौहा पढ़ा कर लोगों की आंखें नम कर दीं। इसके बाद अंजुमनों ने नौहाख्वानी की। अंजुमन ऑल इंडिया गुलदस्ते हैदरी के मीडिया प्रभारी शानू काजमी ने बताया कि जखीरा में जुर्रियत हुसैन काजमी की ओर से कदीमी आशुरा अलम सजने के साथ ही शुरू हो गया है, जो अली काजमी ने अंजुमन ऑल इंडिया गुलदस्ते हैदरी की ओर से आयोजित किया। इसमें बृहस्पतिवार को आशुरे का दूसरा मातम हुआ। इस मौके पर अली हाशिम जैदी ने नौहा ख्वानी की और सलीम रिजवी ने मरसिया पढ़ा।