बरेली। मां सिद्धिदात्री के पूजन के साथ सोमवार को शारदीय नवरात्र पूरे हो गए। नवमी पूजन के बाद लोगों ने कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर भोज कराया और फिर व्रत का परायण किया। तमाम लोग कन्याओं को जिमाने के बाद मंदिरों में भी पहुंचे और मां के दर्शन किए।
सुबह होते ही लोग कन्याओं की तलाश में भागते-दौड़ते दिखे। कन्या पूजन के बाद उन्हें उपहार और फल देकर आशीर्वाद लिया। इसके साथ सुबह से ही कालीबाड़ी, सुभाषनगर के श्री हरे राम ग्वाल बाल नवदुर्गा मंदिर, मां वैष्णो मनोकामना धाम मंदिर, किला के नवदुर्गा आदि तमाम मंदिरों में भी श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। लोगों ने अपनी मन्नत के अनुरूप मां को भोग लगाया। नवरात्र के अंतिम दिन भीड़ उमड़ने की संभावना देखते हुए मंदिरों में पुजारियों की संख्या भी बढ़ाई गई थी। नवमी पर मां की विदाई के दौरान सभी देवी मंदिरों में भजन-कीर्तन चलता रहा। जिन घरों में हाल ही में शादी या बच्चे का जन्म हुआ था, वहां मान्यता के अनुसार सत्संग हुआ। नवरात्र पर अबूझ मुहूर्त होने के कारण शाम को शहर खरीददारी के लिए लोग खूब उमड़े।
कन्याओं को मिली एजुकेशन किट और कलर्स के पैक
कन्या भोज के बाद कन्याओं को रुमाल, टिफिन या पैसे के बजाय उनके मनमुताबिक गिफ्ट देने का ज्यादा जोर रहा। डीडीपुरम के राधिका गिफ्ट सेंटर के मालिक विकास नागपाल ने बताया कि इस बार ज्यादातर श्रद्धालुओं ने एजुकेशन किट, प्लास्टिक बैग के जगह कपड़े से बना बैग में तरह-तरह के कलर, पेंसिल, छोटी सी नोटबुक, इरेजर, शार्पनर का पूरा पैक कराया था। बच्चों के लिए स्पेशल चॉकलेट भी इसमें थी। आर्टिफिशियल ज्वैलरी भी दी गई। ज्वैलरी किट में ब्रेसलेट, बैंड, क्राउन, कीरिंग, बार्बी, कार्टून पर्स और हैंड बैग आदि सामान था।
मंदिरों में सजी झांकियां
बदायूं रोड पर मां वैष्णो देवी धाम मंदिर में नवमी पर सुबह पुजारी राकेश ने हवन कराया और फिर शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। महिला मंडली ने दोपहर में भजन, कीर्तन किया। शाम को विभिन्न देवी, देवताओं के स्वरूप में सजे नन्हे मुन्नों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
मंदी और हताशा का संकेत देकर नंगे पांव विदा हुईं मां
बरेली। पिछले साल की तरह इस बार भी मां दुर्गा गज पर सवार होकर आई थीं। ज्योतिषाचार्यों ने इसे सुख-समृद्धि और अच्छी वर्षा का संकेत बताया था लेेकिन नंगे पांव मां के विदा होने को वे शुभ संकेत नहीं मान रहे। उन्होंने इसे निराशा और व्याकुलता का प्रतीक बताया है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि मां के नंगे पांव विदा होने के अर्थव्यवस्था की रफ्तार सुस्त होने के साथ जन-धन के नुकसान और लोगों में हताश और चिंता बढ़ने जैसे प्रभाव हो सकते हैं।
ज्योतिषाचार्य पं. नीरज शर्मा के मुताबिक मां का आगमन गज पर हुआ था लेकिन उनका गमन बिना किसी वाहन हुआ है। देवीभागवत पुराण में कहा गया है ‘शशि सूर्य दिने यदि सा विजया महिषागमने रुज शोककरा, शनि भौमदिने यदि सा विजया चरणायुध यानि करी विकला, बुधशुक्र दिने यदि सा विजया गजवाहन गा शुभ वृष्टिकरा, सुरराजगुरौ यदि सा विजया नरवाहन गा शुभ सौख्य करा’। इस श्लोक से पता लगता है कि मंगल और शनिवार के दिन विदाई होने पर माता किसी भी वाहन पर नहीं जाती हैं। नवमी सोमवार को है लेकिन दशमी तिथि सोमवार की दोपहर लग जाने के बावजूद उदया तिथि का मान होने की वजह से मंगलवार को मानी जाएगी। विसर्जन और विजयदशमी मंगलवार को होगा। उन्होंने बताया कि दोपहर तीन बजे के बाद विजयदशमी का मुहूर्त बन चुका है लेकिन उदयातिथि का मान होने से विजय दशमी मंगलवार को मनाई जाएगी।