बरेली। कथा व्यास डॉ. पंडित श्याम सुंदर पाराशर ने मां का महत्व बताते हुए कहा कि बालक की प्रथम गुरु उसकी मां होती है। बालक में जो भी प्रथम भाव स्थापित होते हैं वह सब मां के सिखाए होते हैं। ध्रुव की माता ने सदाचार तथा सद्मार्ग के बारे में बताया, जिसके कारण मात्र पांच वर्ष की अल्प आयु में उन्हें भगवान के दर्शन हुए थे।
बाबा त्रिवटीनाथ मंदिर में संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा व्यास पंडित डॉ. श्याम सुंदर पाराशर शास्त्री ने बताया कि माता के दिए गए संस्कार के कारण ही भक्त प्रहलाद का मन भगवान नारायण के चरणों में लग सका। भक्त के विश्वास के कारण ही स्वयं नारायण को एक खंबे के अंदर से प्रकट होना पड़ा। जब-जब पृथ्वी पर धर्म की हानि होती है तब-तब स्वयं नारायण यहां अवतरित होते हैं। द्वापर युग में जब कंस का अत्याचार बढ़ा तो भगवान को श्रीकृष्ण का अवतार लेना पड़ा। आयोजन में मंदिर कमेटी के प्रताप चंद्र सेठ, हरिओम अग्रवाल, संजीव औतार अग्रवाल का मुख्य सहयोग रहा।