बरेली। यौमे आशुरा की पूर्व संध्या बहुत अहमियत की रही। हर तरफ हजरत इमाम हुसैन का जिक्र और या हुसैन की सदाएं बुलंद होती रहीं। कहीं जलसे हुए तो कहीं मीलाद की महफिल सजी। इसी सिलसिले में शहर भर के सारे इमामबाड़ों पर तमाम औरत मर्द नियाज नजर के लिए पहुंचे रहे। जहां तख्तों ताजिए पर नियाज नजर पेश कर अकीदत नजराना पेश किया।
शहर भर के सारे ही तख्तो ताजिए और अलम मोहर्रम नौ तारीख सोमवार को अपने अपने इमामबाड़ों में रखे गए। खूबसूरत सजावट और रूहानी माहौल के बीच लगभग हर इमामबाडे़ पर मेले जैसा माहौल नजर आ रहा था। इसमें खास तौर से मलूकपुर के इमामबाड़ा फतेहनिशान पर भारी भीड़ रही। यहां लोग पंजे शरीफ की जियारत के साथ ही अलम शरीफ पर फूल और नजर पेश करते नजर आए। इधर एजाज नगर गौटिया में पुरानी मस्जिद के पास खाने काबा और इमाम हुसैन का रौजा सजाया गया था। जिसे देखने के लिए दूर दराज इलाकों से लोग रात भर पहुंचते रहे। यहां पर लंगरे आम भी जारी रहा। मौलाना अंसारुल हक अजहरी ने बताता कि रौजे के इस मॉडल को यामीन रजा ने सजा है।
इसके अलावा रोहली टोला स्थित डेढ़ सौ साल पुराने मदीना शाह के इमामबाड़े पर भी भारी सजावट रही। यहां तखत के अलावा इमाम हुसैन का रौजा भी सजाया गया। जिसे देखने के लिए भीड़ लगी रही। मुहम्मद तसलीम ने बताया कि यहीं पर एक पुराना कुंआ है जिसकी अपनी मान्यताएं हैं वहां पर भी लोगों नियाज नजर करते नजर आए। इस दौरान यहां पर जिक्रे शहादतैन और नियाज नजर का भी आयोजन किया गया। इसमें हाजी हसीन, हाजी हसनैन, गुड्डू भाई, तस्लीम, मुहम्मद साजिद सकलैनी, नासिर खां आदि का सहयोग रहा। इसी तरह शहर के तमाम इमामबाड़ों पर नियाज नजर के लिए आने जाने वालों का तांता लगा रहा। कोई शर्बत और मलीदों पर नियाज दिला कर मन्नतो मुराद मांग रहा था तो कोई मन्नती ताजिए और अलम पेश करके दुआएं मांगता नजर आया। यह माहौल पुराना शहर, किला क्षेत्र और शाहबाद, अजमनगर में देखने को मिला।