बरेली। मोहर्रम अपने शबाब पर पहुंचने लगा है। शहर भर में चल रही अजादारी के बीच छठी मोहर्रम को खानकाह नियाजिया का कदीमी जुलूस अपने रिवायती अंदाज में निकाला गया। हरे लिबास में शामिल हुसैनी लश्कर तखतो ताजियों के साथ चलते हुए एक अलग सा मंजर पेश कर रहे थे। इस जुलूस का रास्ते भर हिंदू मुस्लिम सभी ने जोशो अदब के साथ स्वागत किया।
जुलूस निकलने से पहले इमामबाड़ा पर सज्जदानशीन शाह मोहम्मद हसनैन नियाजी उर्फ हसनी मियां ने फातेहा पढ़ी और दुआ की। इस दौरान नायब सज्जादा अल्हाज शाह मेंहदी मियां सहित तमाम खानवादों की मौजूदगी रही। इसके बाद नजर और सलामी पेश कर जुलूस को रवाना किया गया। यह जुलूस खानकाह से ढ़ोल की मातमी धुन के साथ प्रबंधक शब्बू मिया नियाजी की कयादत में आगे बढ़ता रहा। जो गली वजीर अली, कटरा चांद खां, कोहाड़ापीर, सुर्खा बानखाना होता हुआ देर रात गढ़ी चौक पहुंचा। जहां नियाजिया इंग्लिश स्कूल में पड़ाव किया। यह जुलूस शनिवार को सुबह अपने निर्धारित मार्गों से होता हुआ वापस होगा। इसमें देश के विभिन्न कोने से आए बड़ी संख्या में अकीदतमंद भी शामिल रहे। रास्ते में जुलूस के स्वागत में हिंदू मुस्लिम सभी ने जुलूस पर फूल बरसाने के साथ कहीं शर्बत की सबील लगाई किसी ने चाय और दूसरी खान पान की चीजें जुलूस बांटी। इसके अलावा पुराना शहर और किला आदि में भी निकले तखत की गश्त जारी रही।
लंगर में लुटाए सोने चांदी के सिक्के
बरेली। खानकाह नियाजिया में जुुलूस के दौरान हजरत इमाम हुसैन के नाम पर भारी लंगर किया गया। खास तौर से साहिबे सज्जादा शाह हसनी मियां ने सोने और चांदी के सिक्के लंगर के तौर पर लुटाए। इसी तरह खानकाह के दीगर लोगों के अलावा दूर दराज से आए महिला पुरुष मुरीदों ने भी तमाम चीजें लंगर की। इसमें मोबाइल, कपड़े, कूकर, बर्तन और तरह तरह के खान पान के सामानों का भी लंगर किया। जिसे पाने के लिए लोगों में होड़ लग गई। इस दौरान या हुसैन की सदाओं से खानकाह का पूरा आहता घंटों गूंजता रहा।