फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कहीं नौहा ख्वानी हुई तो कहीं जुलूस भी निकाले

विज्ञापन
विज्ञापन
बरेली। शिया हल्कों में मातमों मजलिस का दौर बदस्तूर जारी है। बुधवार को कहीं नौहा ख्वानी हुई तो कहीं जुलूस भी निकाले गए। मजलिसों में जिक्रे इमाम हुसैन करते हुए उलमा ने कहा कि इस्लाम की बेहतरी (बका) का नाम हुसैन है। आज उनकी कुर्बानी से इस्लाम जिंदा है।
विज्ञापन

इस मौके पर गढै़या के हकीम आगा साहब इमामबाड़े में मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना शफी असगर नजमी सिरसिवी ने आले रसूल के किरदार पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि नवासे रसूल हजरत इमाम हुसैन ने अपने नाना की उम्मत और इस्लाम को बचाने के लिए अपना पूरा कुनबा कुर्बान कर दिया। उसमें छह माह के नन्हें अली असगर और 18 बरस के जवान अली अकबर भी शामिल थे।
इसी तरह कोहाड़ापीर पर लईक हुसैन जैदी के इमामबाड़ा में भी मजलिस हुई। इसमें अलीगढ़ के मौलाना हसन असकरी ने खिताब किया। इसके बाद अंजुमन आल इंडिया गुलदस्ते हैदरी ने नौहा ख्वानी की। इसी तरह इमामबाड़ा छिद्दी हुसैन में बाराबंकी के मौलाना जैनुल हसन ने हबीब इब्ने मजाहिर के फजाइल और मसाइब बयान किए। इसके अलावा शहर के तमाम इमामबाड़ों में मातमो मजलिस का दौर जारी रहा।
विज्ञापन

उधर, रात में काला इमामबाड़ा में मजलिस के बाद अलम का जुलूस निकाला गया। जुलूस अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ मुबारक महल स्थित अदीब भाई इमामबाड़े पहुंचकर संपन्न हुआ। इन तमाम तकरीबों में महमूद हसन नकवी, इलियास हुसैन रिजवी, असलम एजाज रिजवी, नाजिम हुसैन (अत्ते), अली आलिम जैदी, शानू काजमी आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें