फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हरतालिका व्रत कब रखें... एक सितंबर को या दो को

विज्ञापन
विज्ञापन
बरेली। पति की दीर्घायु और मंगल की कामना के लिए रखे जाने वाले हरतालिका तीज व्रत को लेकर इस बार असमंजस बना हुआ है। आमतौर पर भादों की शुक्ल पक्ष तृतीया को यह व्रत रखा जाता है, लेकिन इस बार कुछ पंडित एक तो कुछ दो सितंबर को व्रत रखने की सलाह देने महिलाएं असमंजस में पड़ गई हैं। व्रत कब रखा जाए इस सवाल का जवाब पाने के लिए शनिवार को पंडितों के फोन घनघनाते रहे।
विज्ञापन

ज्योतिषाचार्य पं. विकास उपाध्याय ने बताया कि हरतालिका तीज का व्रत गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले रखा जाता है। समस्या यह है कि इस साल पंचांग की गणना के अनुसार तृतीया तिथि का क्षय हो गया है। यानी कि पंचांग में तृतीया तिथि का मान ही नहीं है। इस हिसाब से एक सितंबर को जब सूर्योदय होगा तो द्वितीया तिथि होगी जो सुबह 8.27 बजे खत्म होगी। फिर तृतीया तिथि लग जाएगी। वहीं, तृतीया तिथि अगले दिन यानी कि दो सितंबर को सूर्योदय से पहले ही सुबह 4.57 बजे पर समाप्त हो जाएगी। असमंजस इस बात का है कि जब तृतीया तिथि को सूर्य उदय ही नहीं होगा तो व्रत किस आधार पर रखा जाए।
पंडित उपाध्याय का तर्क है कि हरतालिका तीज का व्रत हस्त नक्षत्र में किया जाता है, जो कि एक सितंबर को है। इसलिए व्रत एक सितंबर को रखा जाना चाहिए। कहा, अगर दो सितंबर को व्रत रखते हैं तो उस दिन सूर्योदय के बाद चतुर्थी लग जाएगी। ऐसे में तृतीया तिथि का व्रत मान्य नहीं होगा।
विज्ञापन


हरतालिका तीज व्रत का महत्व
मान्यता है कि पार्वती माता का विवाह उनके पिता हिमालय ने किसी और से तय कर दिया था जबकि वह शिवजी को पति मान बैठी थीं। माता पार्वती को जब ये बात पता चली तो वो बालू से शिवलिंग बनाकर तप करने लगीं। तप से प्रसन्न होकर शिव जी ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इसलिए इस दिन को हरतालिका तीज के रूप में मनाया जाने लगा। महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अच्छा वर पाने के लिए इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं।
विज्ञापन


मुहूर्त
तृतीया तिथि प्रारंभ : 1 सितंबर सुबह 8.27 बजे
तृतीया तिथि समाप्त: 2 सितंबर सुबह 4.57 बजे
हरतालिका पूजन : सुबह 8.27 बजे से 8.37 बजे तक
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें