बरेली। माधोबाड़ी स्थित श्री रामायण मंदिर में चल रहे तुलसी जयंती महोत्सव के क्रम में रविवार को श्रीराम कथा के चौथे दिन कथा व्यास रविनंदन शास्त्री ने प्रकृति के संरक्षण का संकल्प श्रद्धालुओं को कराया। उन्होंने जल संरक्षण पर जोर देते हुए वर्षा जल का संचय और पेयजल की बरबादी से बचने की सलाह दी।
उन्होंने बताया कि भजन के लिए समय की नहीं बल्कि चित्तवृत्ति का अहंकार मुक्त होना जरूरी है। ‘हरि का भजन करो, हरि है तुम्हारा। हरि के भजन बिना नाही गुजारा’ भजन सुनाकर तन के बजाय मन की शुद्धि पर जोर दिया। कहा, निर्मल चित्त से किया गया ईश्वर का भजन ही सार्थक है। भजन के बाद भी भजन रस न मिलने से मन भटकता है। मन रूपी हाथी को वैराग्य और अभ्यास रूपी अंकुश से नियंत्रित कर एकाग्र कर सकते हैं। ‘तुझे देखना इबादत, तेरी याद बंदगी है, तुझे कैसे भूल जाऊं, तू तो मेरी जिंदगी है’ भजन सुनाया। आरती व प्रसाद वितरण से कथा का समापन हुआ। आयोजन में जगदीश भाटिया का सहयोग रहा।