गजलकार सिया सचदेवा के गजल संग्रह ‘तन्हाइयों का रक्स’ का विमोचन यहां रोटरी भवन में किया गया। सिया ने यह संग्रह अपने पति सरदार महेंद्र सिंह की मधुर स्मृतियों को समर्पित किया है।
इस मौके पर यहां अक्षरा फाउंडेशन की ओर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें मशहूर गजलकार चरन सिंह बशर ने बतौर मुख्य अतिथि और गजलकार संजय शौक लखनवी ने अध्यक्षता करते हुए गजल संग्रह का विमोचन किया। इससे पहेल कार्यक्रम में सरदार महेंद्र सिंह की स्मृतियों का संस्मरण सुनाया गया। इसमें गजलकार आलोक यादव, डा. अवनीश यादव, विकास अग्रवाल, सचिन अग्रवाल, आदित्य सोमरूपा, विशाल आदि ने स्वर्गीय महेंद्र सिंह के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला।
इसके अलावा पुस्तक की समीक्षा आकाशवाणी की निदेशक मीनू खरे ने की। सिया सचदेवा ने पुस्तक लेखन पर प्रकाश डाला। गायिका हितु मिश्रा ने सिया की गजलों को संगीतबद्ध कर के प्रस्तुत किया। बीच बीच में बाहर से आए कवियों ने अपनी रचनाएं भी प्रस्तुत की। संचालन कवि डा. राहुल अवस्थी ने किया। स्वागत एवं आभार शरद मिश्रा ने व्यक्त किया।
काव्यात्मक श्रद्धांजलि है तन्हाइयों का रक्स
बरेली। जिंदगी में कोई मिसरा भी न पूरा होता। तुम न होते तो हर इक शेर अधूरा होता।। यह भाव है गजलकार सिया सचदेवा के। जो उन्होंने अपने पति महेंद्र सिंह की याद में गजल संग्रह ‘तन्हाइयों का रक्स’ में पिरोते हुए पूरी पुस्तक पति को समर्पित की है।
उन्होंने संग्रह विमोचन कार्यक्रम से पूर्व पत्रकारों से बात करते हुए बताया कि यह पुस्तक एक पत्नी की ओर से पति को श्रद्धांजलि है जो अपने शब्दों के माध्यम से प्रेषित की है। पति के दुनियां से चले जाने के बाद यह शेरी मजमुआ (पुस्तक) उन्होंने चार महीने मुकम्मल की है।
इस दौरान गजलकार आलोक यादव ने अक्षरा फाउंडेशन के बारे में बताया कि इसका गठन 2014 में किया था। साथ सिया सचदेवा के पति महेंद्र सिंह के बारे में कहा कि वो कवि बेशक नहीं थे मगर इस संस्था से जुड़े रहे। उन्होंने सिया को हमेशा इस क्षेत्र में प्रोत्साहित किया और सभी कार्यक्रमों में लेकर जाते भी थे।