व्यवस्था की आंखों में झोंक रहे धूल, मृतकों के दस्तावेज और फर्जी सत्यापन रिपोर्ट पर करा रहे मुल्जिमों की रिहाई
बरेली। पुलिस-प्रशासन की नाक के नीचे फर्जीवाड़ा हो रहा है। कचहरी परिसर के आसपास सक्रिय फर्जी जमानतदार मुल्जिमों की रिहाई का ठेका ले रहे हैं। ये जमानत में फर्जी दस्तावेज तो लगाते ही हैं, झूठी सत्यापन रिपोर्ट पर मुल्जिमों की रिहाई भी करा देते हैं। इस काम में कई बार ये मृतकों की खतौनी और वाहनों के कागजात का भी इस्तेमाल करते हैं। इसमें शहर के साथ ही बदायूं व पीलीभीत के लोग भी शामिल हैं।
कुछ दिन पहले गो तस्करी के आरोपी हाफिजगंज थाना क्षेत्र निवासी कुंजी की जमानत में सीबीगंज थाने और सदर तहसील की फर्जी सत्यापन रिपोर्ट लगाई गई थी। आरोपी हाजिर नहीं हुआ तो अदालत ने जमानतदारों को नोटिस भेजा। सीबीगंज के मथुरापुर निवासी सगीर अहमद और शकील अहमद को नोटिस मिला तो उन्होंने अदालत में शपथपत्र देकर बताया कि उन्होंने जमानत ली ही नहीं है। तब फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
सूत्र बताते हैं कि कचहरी के आसपास सक्रिय गिरोह के सदस्य जेल में बंद मुल्जिमों के परिजनों से सौदा करते हैं। इनकी थानों के पैरोकारों और तहसील के स्टाफ से सेटिंग रहती है। इसलिए वह अपने कागजों का सत्यापन भी आसानी से करा लेते हैं। गिरोह के सदस्य एक ही कागजात पर कई जमानत कराते रहते हैं। अगर सभी थानों के रजिस्टर से यह जांच करा ली जाए कि कौन कितनी बार जमानत ले रहा है तो पूरा खेल उजागर हो जाएगा।
कुछ जालसाज खुद ही पुलिस और तहसील के अधिकारियों की फर्जी मुहर और हस्ताक्षर से तैयार सत्यापन रिपोर्ट कोर्ट में जमा कर देते हैं। नियमानुसार अदालत से डाक द्वारा संबंधित विभागों को प्रपत्र भेजे जाते हैं। विभाग उनका सत्यापन कर डाक द्वारा ही रिपोर्ट अदालत को भेजते हैं। इसमें काफी वक्त लगता है और भेद खुलने का भी डर रहता है। इसलिए ये लोग फर्जी रिपोर्ट लगाकर मुल्जिमों को रिहा करा लेते हैं।
हाल ही में कोतवाली इलाके में फर्जी मुहर बनाने के मामले का राजफाश हुआ था। गो तस्करी के आरोपी कुंजी की जमानत के मामले में भी सीबीगंज पुलिस और लेखपाल की फर्जी मुहर लगाकर सत्यापन रिपोर्ट तैयार की गई थी। वीरेंद्र नाम के दरोगा और अवधेश कुमार नाम के लेखपाल की कभी वहां तैनाती ही नहीं रही। इस मामले में जिला जज के रीडर ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
फर्जी कागजातों पर हुई थी सभासद के हत्यारोपी की जमानत
वर्ष 2024 में हुए सभासद भूपेंद्र राठौर हत्याकांड के एक आरोपी की जमानत फर्जी कागजों से कराई गई थी। बदायूं जिले के बिनावर थाना क्षेत्र निवासी ओमवीर ने फर्जी रिपोर्ट बनाकर जमानत कराने के आरोप में कोतवाली में तीन लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस रिपोर्ट में ऐसे कई मामलों का जिक्र था। बाद में एक-दो लोगों की गिरफ्तारी कर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
आईएमसी नेता पर लगा फर्जी जमानत कराने का आरोप
भाजपा से जुड़े शारिक अब्बासी ने मौलाना तौकीर रजा की पार्टी आईएमसी के एक नेता पर फर्जी जमानत लेने का आरोप लगाया था। वर्ष 2023 में शारिक और उनकी पत्नी को पीटने का आरोप चक महमूद निवासी साजिद सकलैनी पर लगा था। इस मामले में नेता ने जमानत कराई तो शारिक ने आरोप लगाया कि मृत व्यक्ति के कागजातों पर जमानत हासिल की गई थी। अब ये मामला कोर्ट व पुलिस के संज्ञान में आया है। ब्यूरो
किला व कोतवाली में ऐसे मामले दर्ज हैं। फर्जी मुहर बनाने के मामले की भी विवेचना की जा रही है। संगठित होकर फर्जी जमानत का धंधा किया जा रहा है तो गिरोह को चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी। - मानुष पारीक, एसपी सिटी