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सब्जी मंडी में जमाखोरी पर शासन का पहरा, अब तय होंगे दाम

सार

आलू-प्याज और टमाटर पर बेतहाशा महंगाई के बाद जागा शासन, मंडी परिषद को जारी किए निर्देश
 
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सब्जी में लगे प्याज के ढेर। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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विस्तार
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तीन महीनों की जरूरत के मुकाबले शीतगृहों में तीन गुने से ज्यादा आलू फिर भी महंगाई
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जमाखोरी पर कार्रवाई के साथ आलू की निकासी कराकर भाव काबू में रखने के निर्देश

बरेली। अगले तीन महीनों की जरूरत के मुकाबले शीतगृहों में तीन गुने से भी ज्यादा आलू भंडारित होने के बावजूद महीने भर के अंदर उसका भाव 40 फीसदी से ज्यादा बढ़ गया है। इसी तरह प्याज और टमाटर का भाव भी बर्दाश्त से बाहर होता जा रहा है लेकिन फिर भी जिलों का सरकारी सिस्टम बेखबर बना हुआ है। संसद यह मामला गूंजने के बाद अब शासन सब्जियों की जमाखोरी पर गंभीर हुआ है। मंडी परिषद को इन तीनों सब्जियों के दाम तय कराने के साथ शीतगृहों में भंडारित आलू की निकासी कराने को कहा गया है।
पिछले करीब दो महीनों से सब्जियों पर लगातार महंगाई बढ़ रही है। अनलॉक-4 शुरू होने के बाद इसमें और ज्यादा तेजी आई है। बरसात के मौसम में मांग बढ़ते ही व्यापारियों ने शीतगृहों में भंडारित आलू और प्याज की निकासी बंद कर दी। आपूर्ति और मांग में अंतर पैदा होने के साथ भाव बढ़ना शुरू हो गया। दूसरी तरफ व्यापारियों ने प्रचार शुरू कर दिया कि बाहर से सब्जियाें की आवक कम हो गई है। नतीजा यह हुआ कि महीने भर में ही रिटेल में आलू 25 रुपये से 35-40 तक पहुंच गया। हल्द्वानी से आने वाला पहाड़ी आलू तो रिटेल सब्जी मंडी में 50 रुपये किलो बिक रहा है। टमाटर 70 से 80 रुपये किलो हो गया है। प्याज भी 30 रुपये किलो बेचा जा रहा है।

पड़ोस के बदायूं में ही आलू की सबसे ज्यादा जमाखोरी

पड़ोस के जिलों में आलू का सर्वाधिक उत्पादन आगरा, फर्रुखाबाद और बदायूं में होता है। मंडल के जिले बदायूं में शीतगृह ज्यादा हैं इसलिए वहां जमाखोरी भी जमकर हो रही है। आलू की मांग का कोल्ड स्टोरेज मालिक और थोक व्यापारी दोनों फायदा उठा रहे हैं। मंडी में गोल लाल मिट्टी वाला आलू पूना से आ रहा है जो रिटेल में 40-50 रुपये किलो तक बिक रहा है लेकिन खाने में अच्छा न होने की वजह से मांग कम है।
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पिछले महीने ही शासन ने किया था

अलर्ट पर अफसरों ने नहीं सुना

सब्जियों के तेजी से भाव बढ़ने के बाद शासन ने उस पर अंकुश लगाने के लिए पिछले महीने ही बरेली समेत सभी जिलों के डीएम को निर्देश दिए थे लेकिन सिस्टम में इसे अनसुना कर दिया गया। मामला संसद तक गूंजा तो शासन ने आलू-प्याज और टमाटर की कीमतों में लगातार उछाल का संज्ञान लिया। प्रमुख सचिव बीएल मीणा ने पत्र जारी किया है कि प्रदेश में तीन महीने की खपत को देखते हुए तीन गुना से भी ज्यादा आलू भंडारित है। उन्होंने शीतगृहों से आलू निकासी कराने और जमाखोरी पर कार्रवाई कर भाव काबू में करने का निर्देश दिया है। प्रमुख सचिव ने कहा कि शासन ने कीमतों पर काबू रखने की जिम्मेदारी मंडी परिषद को सौंपी है।

अलग-अलग मौसम में सब्जियों का भाव बदलता रहता है। शासन ने मंडी परिषद से मूल्य नियंत्रित करने को कहा है। मंडी में आढ़तियों और थोक व्यापारियों से बात करेंगे। जल्द दामों में गिरावट नजर आएगी। - अनिल कुमार, मंडी सचिव

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हरी सब्जी, टमाटर, प्याज, आलू पर मौसम की मार है। टमाटर ऐसी सब्जी है जिसकी जमाखोरी नहीं हो सकती है। हल्द्वानी का आलू कुछ दिनों से नहीं आ रहा है। प्याज पर चार-पांच रुपये बढ़े हैं। दिवाली तक आलू और प्याज पर महंगाई रहने का अंदेशा है। - शुजा उरहमान, अध्यक्ष थोक सब्जी मंडी एसोसिएशन

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