जिलाधिकारी बरेली सुरेंद्र सिंह ने बुधवार को जिले के शिक्षकों को सादर प्रणाम करने के बाद अपना परिचय सरकारी स्कूल में पढ़े विद्यार्थी के रूप में देकर बात शुरू की। सरकारी शिक्षा का हाल देख कर जो तकलीफ हर खासओआम को होती है वो बयान की और फिर कई टिप्स दिए जिससे हालात कुछ सुधर सकते हैं। उन्होंने बताया कि प्राइमरी स्कूूलों पर होने वाला सरकारी खर्च किसी कान्वेंट से अधिक होता है फिर ये हाल क्यों है। एक तजबीज रखी कि सरकारी स्कूलों मेँ मेधावी बच्चों के साथ ही ऐसे शिक्षक खोजे जाएं जो वाकई बच्चों पर मेहनत करते हैँ और फिर इन्हें रोल माडल बनाया जाए।
बुधवार को संजय कम्युनिटी हॉल में आयोजित शिक्षाग्रह कार्यक्रम में शिक्षकों के साथ संवाद ने मार्मिक ढंग से हालात बयां किए । बताया कि वह खुद सरकारी स्कूल से पढ़े हुए हैं और डीएम बनने से पहले ढाई महीने तक बच्चाें को पढ़ाया भी है। आज सरकारी विद्यालयाें से कोई संतुष्ट नहीं है। स्कूल बढ़े, बच्चे बढ़े, शिक्षक बढ़े, सुविधाएं बढ़ी लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता गिर गई। इसके लिए हम सभी जिम्मेदार हैं। अगर किसी रिक्शा चालक के जेब में पैसे हो तो वह भी अपने बच्चे को हमारे स्कूलों में नहीं पढ़ाना चाहेगा। आज जो अपराध हो रहे हैं उसके जिम्मेदार गुरु हैं, क्योंकि वे अच्छी शिक्षा नहीं दे पा रहे हैं।
सीडीओ शिव सहाय अवस्थी ने कहा कि स्कूलों में महिला शिक्षिकाएं स्वेटर बुनती हैं और पुरुष शिक्षक आते नहीं। इस पर हंगामा हुआ, जिसे डीएम ने संभाला। इस मौके पर एसडीएम सदर अपूर्वा दूबे, बीएसए चंदना राम, बीईओ नरेंद्र सिंह पवार, जिला समन्वयक राकेश माथुर, इंद्रेश सिंह व अन्य कई शामिल रहे।
नेता नहीं शिक्षक चाहिए
डीएम ने बताया कि एक बार एक स्कूल गए और वहां गांव वालाें से पूछा कि कौन शिक्षक नहीं आते। पता चला कि सफेद कुर्ते में खड़े गुरुजी ज्यादा नहीं आते। मैंने कार्रवाई की बात कही तो उनके चेहरे पर शिकन और डर नहीं था। उसने मेरे ड्राइवर से बताया कि मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। निकम्मे और कामचोर लोगों का बचाव करने वाले भी नहीं बचेंगे।
आदर्श शिक्षक संवारेंगे बच्चों की तकदीर
डीएम ने कार्यक्रम बनाया है जिसके तहत हर स्कूल से आठ बच्चे चुने जाएंगे। चार बच्चे शिक्षक के होंगे और चार को रैंडम तरीके से चुना जाएगा। इनको स्कूल के शिक्षक प्रतियोगिता के लिए तैयार करेंगे। न्याय पंचायत स्तर पर प्रतियोगिता होने के बाद जिला स्तर के लिए हर स्कूल से प्रथम तीन बच्चे चुने जाएंगे। प्रश्न पत्र डीएम खुद तैयार करेंगे। टॉप टेन बच्चों को और उनके गुरुआें को सम्मानित किया जाएगा।
सुधार कुछ ऐसे करेंगे
कारपोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी के तहत क्वालिटी एजुकेशन के लिए ईंट भट्ठों वालाें से मदद लेंगे
शिक्षकों की समस्या सुलझाने को तहसील दिवस की तरह बीआरसी दिवस होगा
शिक्षकाें की डायरी चेक होगी कि कौन कितने पानी में है
दो माह में सभी स्कूलों में शौचालय बन जाएंगे
एक हफ्ते में शिक्षक खाली स्कूलों में पहुंचेंगे
जिन्होंने गलत पोस्टिंग करा रखी है उनका तबादला होगा
डीएम के टिप्स
जैसे जनगणना और चुनाव में काम करते हैं वैसे ही शिक्षा में करें
अधिकारी खाने की गुणवत्ता चेक करते हैं शिक्षा की भी करें
किताब और बच्चों की संख्या पर नहीं गुणवत्ता पर ध्यान दें
अपने संगठन के लिए लड़ रहे हैं, बच्चों के लिए लड़ेें
कांवेंट से मुकाबला नहीं कर सकते तो हम मानसिक विकलांग हैं
इंग्लिश ही सबकुछ नहीं, लेकिन इंग्लिश के बिना भी कुछ नहीं
अगर कोई स्वेच्छा से पढ़ाने आ रहा है तो उसे न रोकें
कोई शिक्षक और स्कूल पर अनावश्यक दबाव न बनाएं
हम ऐसे हैं और ऐसे ही रहेंगे यह विचार बदल दें
अनुशासन का मतलब यह नहीं कि बच्चे डिप्रेशन में चले जाएं
डेली का प्लान बनाकर पढ़ाएं
सस्पेंसन कारण पर होगा, बहाली रिश्वत पर नहीं होगी
- ये क्या हाल है
छुट्टी लेने के लिए रिश्वत देनी पड़ती है
सिर्फ शिकायतें ही शिकायतें हैं
भ्रष्टाचार की वजह सेे है छात्र संख्या कम
सस्पेंड होने के लिए पैसे देते हैं, यह शर्म की बात