बरेली। दरगाह आलाहजरत के सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा कादरी (अहसन मियां) ने बुधवार को कहा कि कोरोना महामारी को देखते हुए भीड़भाड़ वाली जगह पर जाने से परहेज करें। सामूहिक रूप से नमाज पढ़ने पर पाबंदी के चलते घर पर ही ईद की नमाज की जगह नमाज-ए-चाश्त पढ़े। अलविदा की नमाज के बदले जौहर की नमाज पढ़ी जा सकती है।
सज्जादानशीन ने कहा कि लॉकडाउन का चौथा चरण शुरू हो चुका है। उन्होंने कहा कि जो शरई हुक्म नमाज ए जुमा में है वही हुक्म ईद उल फितर की नमाज में है। इसलिए ईद की नमाज घर में नहीं पढ़ी जा सकती। नमाज ए ईद वाजिब होने की शर्तों में से एक शर्त ये भी है हुकूमत की ओर से कोई बंदिश न हो। चूंकि इस वक्त सामूहिक रूप से नमाज पढ़ना मना है, ऐसी सूरत में ईद की नमाज हम लोगों पर वाजिब नहीं। इसी बिना पर जो शख्स इमाम के साथ ईद की नमाज नहीं अदा कर सका, उसके जिम्मे ईद की कजा भी नहीं है और अगर जुमा की नमाज नहीं पढ़ सका तो जुमा के बदले जोहर अदा कर सकता है। इसलिए अलविदा के दिन मुसलमान घरों में जोहर नमाज अदा करें । ईद की नमाज के लिए उन्होंने कहा कि जिन लोगों को नमाज पढ़ने की इजाजत मिले वो लोग ब जमात अदा कर लें, बाकी लोग इसके बदले घरों में चार रकात नमाज ए चाश्त पढ़ लें। मगर ये नमाज तभी पढ़ें जब शहर में कहीं नमाज ए ईद हो जाए।
दरगाह से जुड़े नासिर कुरेशी ने मुफ्ती अहसन मियां की ओर से बयान जारी करते हुए कहा कि इस महामारी के दौर में ईद की खुशियां मनाना गंवारा नहीं। ईद उल फितर मुहब्बत का पैगाम देता है। इसलिए ईद पर खरीददारी की जगह उस रकम से तंगी के शिकार जरूरतमंदों की मदद करे। नए कपड़े पहनने से परहेज करें ।