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कैशलेस के लिए गांव तक पहुंचाएं फाइनेंस लिटरेसी

Mon, 19 Dec 2016 01:48 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
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Reach Financial Literacy for cashless village - फोटो : बरेली, अमर उजाला
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दिल्ली यूनिवर्सिटी के कॉमर्स विभाग के प्रोफेसर विजय कुमार श्रोत्रीय ने कहा कि कैशलेस भारत की परिकल्पना गढ़ी जा रही है। डिजिटलाइजेशन और ई-लेनदेन के पैमाने पर हम खुद को विश्वपटल पर आंक रहे हैं पर इसमें अभी लंबा वक्त लगने वाला है। कैशलेस भारत की परिकल्पना इसलिए जल्दबाजी लग रहा है कि आज भी 70 फीसदी से ज्यादा भारतीय आनलाइन लेनदेन से बचते हैं। भारतीयों को इस व्यवस्था पर भरोसा जमाने में वक्त लगेगा, उनके मन में असुरक्षा की भावना है जिसको केवल फाइनेंस लिटरेसी से ही दूर किया जा सकता है।
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बरेली कॉलेज में पुरातन छात्र सम्मेलन में आए प्रोफेसर विजय कुमार श्रोत्रीय ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि भारत जैसे देश में जहां फाइनेंस लिटरेसी की सबसे ज्यादा कमी है वहां आनलाइन लेनदेन की परिकल्पना थोड़ा जल्दबाजी है। हालांकि इस फैसले के दूरगामी परिणाम अच्छे आएंगे। भारत की अर्थव्यवस्था निश्चित ही मजबूती मिलेगी। हालांकि वर्तमान समय की बात करें तो नोटबंदी से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर प्रतिकूल असर पड़ा है और यह असर और ज्यादा हो सकता है। वहीं छोटे और मझोले उद्योगों पर भी इसकी मार पड़ी है। हालांकि मंदी के आसार होने से उन्होंने इंकार किया। कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में मंदी ज्यादा असर नहीं करेगी। उन्होंने कैशलेस की जगह लेसकैश को बढ़ावा देने पर ज्यादा जोर दिया। एक सवाल के जवाब में उन्होंने पैसा बदलने की जगह पुराने नोट बैंकों में जमा कराए जाते तो ज्यादा बेहतर होता। विजय कुमार श्रोत्रीय ने बरेली कॉलेज से 1984 में बीकाम, बाद में एमकाम, विधि और पीएचडी की पढ़ाई की है। 
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