फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP News: राशनकार्ड फर्जीवाड़ा... यहां छह हजार से अधिक अपात्र ले रहे सरकारी खाद्यान्न; 400 पर हुई कार्रवाई

Thu, 13 Nov 2025 04:03 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

बरेली के मीरगंज तहसील क्षेत्र में छह हजार से अधिक अपात्र सरकारी राशन ले रहे हैं। अब पूर्ति विभाग ने अपात्रों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। चार सौ अपात्रों के नाम सूची से हटा दिए गए हैं।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बरेली के मीरगंज तहसील क्षेत्र में राशनकार्ड फर्जीवाड़ा में गरीबों का राशन ले रहे आखिरकार 400 अपात्रों पर पूर्ति विभाग ने कार्रवाई की है। इन अपात्रों के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। जांच में 6500 अपात्रों के नाम सामने आए थे। इसमें अब शेष रह गए लोगों के नाम काटने की तैयारी है। आश्चर्यवाली बात है कि इसमें कोई आईटीआर (इनकम टैक्स रिटर्न) भरता था तो कुछ कार स्वामी। इस तरह मीरगंज और फतेहगंज पश्चिमी से संपन्न लोगों ने फर्जी तरह से राशन कार्ड बनवाकर गरीबों का हक छीन रहे थे।

विज्ञापन


मीरगंज और फतेहगंज कस्बे से लेकर देहात क्षेत्रों में पूर्ति विभाग ने अपात्रों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। पहले यह प्रक्रिया कस्बों में शुरू हुई। उसके बाद यह प्रक्रिया ग्रामीण क्षेत्रों में भी शुरू हो गई है। इससे अपात्रों में डर है कि उनके नाम काटे जाने के अलावा कहीं कोई अन्य कार्रवाई तो नहीं होगी। 

पूर्ति निरीक्षक रवि कुमार ने बताया कि राशन कार्डों की जांच की जा रही है। जिन लोगों के पास चारपहिया वाहन है या जो आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करते हैं, उनके कार्ड निरस्तीकरण की सूची में हैं। रिपोर्ट जिला मुख्यालय भेजी जाएगी, जिसके बाद कार्ड आधिकारिक रूप से कार्ड निरस्त किए जाएंगे। विभाग के अनुसार, यह कार्रवाई केवल उन परिवारों पर की जा रही है जो पात्रता मानक से अधिक आय वर्ग में आते हैं। 

विज्ञापन
Trending Videos
विज्ञापन

राशन कोटा डीलरों का मोहभंग, पूर्ति व्यवस्था पर असर
सोमवार को डेलपुर गांव के विक्रेता गुलाब सिंह ने भी कोटे की दुकान से त्यागपत्र दे दिया। इससे पूर्व एक अप्रैल को बकैनिया वीरपुर गांव की उचित दर विक्रेता राजकुमारी ने स्वेच्छा से इस्तीफा दे दिया। डीलरों का कहना है कि सरकार की ओर से उन्हें 90 पैसे प्रति किलो के हिसाब से मेहनताना दिया जाता है, जो बहुत कम है। 

मशीन चलाने, मजदूर रखने और वितरण का सारा खर्च उन्हें खुद उठाना पड़ता है। कई डीलरों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि खाद्यान्न पूरा नहीं मिलता, ऊपर से मशीन चलाने और मजदूरी का खर्च भी हमें उठाना पड़ता है। ऐसे में दुकान चलाना घाटे का सौदा बन गया है, इसलिए कई डीलर खुद ही इस्तीफा दे रहे हैं।

इस्तीफों से अब राशन वितरण व्यवस्था पर संकट के आसार हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर डीलर दुकानें छोड़ते गए, तो गरीबों को समय पर अनाज मिलना मुश्किल हो जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि यदि डीलर दुकानें छोड़ते गए और कार्ड भी कट गए, तो अनाज वितरण पूरी तरह ठप हो सकता है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें