राशन कोटा डीलरों का मोहभंग, पूर्ति व्यवस्था पर असर
सोमवार को डेलपुर गांव के विक्रेता गुलाब सिंह ने भी कोटे की दुकान से त्यागपत्र दे दिया। इससे पूर्व एक अप्रैल को बकैनिया वीरपुर गांव की उचित दर विक्रेता राजकुमारी ने स्वेच्छा से इस्तीफा दे दिया। डीलरों का कहना है कि सरकार की ओर से उन्हें 90 पैसे प्रति किलो के हिसाब से मेहनताना दिया जाता है, जो बहुत कम है।
मशीन चलाने, मजदूर रखने और वितरण का सारा खर्च उन्हें खुद उठाना पड़ता है। कई डीलरों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि खाद्यान्न पूरा नहीं मिलता, ऊपर से मशीन चलाने और मजदूरी का खर्च भी हमें उठाना पड़ता है। ऐसे में दुकान चलाना घाटे का सौदा बन गया है, इसलिए कई डीलर खुद ही इस्तीफा दे रहे हैं।
इस्तीफों से अब राशन वितरण व्यवस्था पर संकट के आसार हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर डीलर दुकानें छोड़ते गए, तो गरीबों को समय पर अनाज मिलना मुश्किल हो जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि यदि डीलर दुकानें छोड़ते गए और कार्ड भी कट गए, तो अनाज वितरण पूरी तरह ठप हो सकता है।