शाही। राशन कार्ड के लिए गरीबों को तरसाने और अमीरों पर मेहरबानी के मामलों पर एक तरफ आम लोगों में गुस्सा बढ़ रहा है तो दूसरी तरफ राशन कोटेदारों के बीच इन दिनों ‘वीआईपी कोटा’ चर्चा में बना हुआ है। बताया जा रहा है कि ‘वीआईपी कोटा’ नेताजी के लिए आरक्षित है, लिहाजा सिस्टम की मजबूरी है कि किसी भी तरह गरीबों का पेट काटकर ‘वीआईपी कोटे’ की भरपाई की जाए। राशन कार्ड के मुद्दे पर पिछले दिनों शाही थाने से लेकर नगर पंचायत और तहसील तक लगातार हंगामे के बाद जरूरतमंद लोगों को राशन कार्ड बनाने का भरोसा दिलाकर शाही नगर पंचायत में सैकड़ों लोगों के आवेदन लिए गए थे, लेकिन अब खुलासा हुआ है कि इन आवेदनों को बगैर कोई रिपोर्ट लगाए ही सप्लाई दफ्तर भेज दिया गया। लिहाजा उन पर राशन कार्ड जारी होना ही मुमकिन नहीं है। सप्लाई विभाग इन आवेदनों को शाही नगर पंचायत वापस भेजने की तैयारी कर रहा है।
शाही के बुजुर्ग लतीफ मियां की मौत के बाद राशन कार्ड प्रकरण पर लगातार गर्मागर्मी चल रही है। लतीफ मियां ने काफी समय पहले राशन कार्ड के लिए आवेदन किया था, इसके बाद महीनों तक नगर पंचायत और तहसील के चक्कर काटते रहे मगर उनका राशन कार्ड नहीं बना। आखिर में वह इतने आजिज आ गए कि उन्होंने समाधान दिवस में सीधे डीएम को चुनौती दे दी कि वह भूख से तड़प-तड़पकर नहीं मरना चाहते। लिहाजा अगर वह उनका राशन कार्ड नहीं बनवा सकते तो उन्हें गोली मार दें। डीएम ने उनकी फरियाद को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम मीरगंज रोहित यादव को उनका राशन कार्ड बनवाने का निर्देश दिया। लतीफ मियां इसके बाद भी चक्कर काटते रहे, लेकिन उनका राशन कार्ड नहीं बना और आखिरकार पिछले महीने उनकी मौत हो गई। लतीफ मियां की मौत सुर्खियां बनी तो यह भी खुलासा हुआ कि सिर्फ लतीफ मियां नहीं, शाही में कच्चे घरों और झोंपड़ियों में गुजर-बसर करने वाले सैकड़ों ऐसे लोग हैं, जिनके तमाम भागदौड़ के बावजूद राशन कार्ड नहीं बनाए गए हैं। दूसरी ओर कई सराफ और डॉक्टरों के राशन कार्ड बने हुए हैं, जिन्हें उसकी कोई जरूरत नहीं है।
सिस्टम की यह संवेदनशून्यता अमर उजाला में मुद्दा बनी तो नगर पंचायत की ओर से पिछले सप्ताह वंचित लोगों से राशन कार्ड के आवेदन मांगे थे। इसके बाद दो जुलाई तक 428 ऑनलाइन आवेदन किए गए। इसके साथ 43 ऐसे लोगों ने भी आवेदन किए जिनके बेवजह यूनिट काटकर राशन कम कर दिया गया था। नगर पंचायत की ओर से इनमें आधे से भी कम आवेदन सप्लाई दफ्तर भेजे गए हैं, वह भी बगैर रिपोर्ट लगाए। नगर पंचायत की रिपोर्ट के बगैर राशन कार्ड नहीं बन सकते, यानी साफ है कि आवेदनों को अब फुटबाल बनाने की तैयारी है। पूर्ति निरीक्षक पशुपति देव का कहना है करीब 200 आवेदन शाही नगर पंचायत से मिले तो हैं, लेकिन उनके साथ सत्यापन रिपोर्ट नहीं है इसलिए इन आवेदनों पर विचार नहीं किया जा सकता और उन्हें वापस भेजा जाएगा।
गरीबों को राशन दें तो वीआईपी कोटा कहां से भरें..
राशन कोटेदारों के बीच चर्चा है कि गरीबों को राशन देना पड़ा तो वे ‘वीआईपी कोटा’ कैसे भरेंगे। बताया जाता है कि ‘वीआईपी कोटा’ के लिए कोटेदारों को हर महीने राशन का इंतजाम करना पड़ता है, साहबों के लिए भी अलग व्यवस्था है, इसी कारण गरीबों के लिए राशन की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। बताया जाता है कि पिछले दिनों शाही के ही एक भाजपा नेता ने इस ‘वीआईपी कोटे’ के खिलाफ ऊपर तक शिकायत की थी, जिसके बाद उसे धमकियां मिलनी शुरू हो गईं तो उसने भी चुप्पी साध ली।
दलाल गरीबों का पैसा खा गए
फिर भी कार्ड अमीरों के ही बने
फतेहगंज पश्चिमी। सिर्फ शाही नहीं, यहां भी सैकड़ों लोग राशन कार्ड के लिए बरसों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। अफसर उनकी फरियाद सुनने को तैयार नहीं हैं। सैकड़ों राशन कार्ड ‘कार-कोठी’ वालों के जरूर बने हुए हैं जिन्हें सरकारी राशन की जरूरत ही नहीं है। इनके कार्ड का राशन कौन खा रहा है, यह पूर्ति कार्यालय ही बेहतर जानता है। तमाम लोग ऐसे हैं जो दलालों को पैसा तक खिला चुके हैं, लेकिन फिर भी उनके राशन कार्ड नहीं बने।
फतेहगंज पश्चिमी नगर पंचायत क्षेत्र में कुल मिलाकर तीन हजार आठ सौ पचपन राशन कार्ड हैं, जिनमें करीब 254 अंत्योदय के है। इनमें से राशन कार्ड कार-कोठी वालों ने तो हथिया रखे हैं लेकिन सिस्टम की अनदेखी की वजह से पात्र लोग मारे-मारे घूम रहे हैं। मोहल्ला सराय के वार्ड 12 में रहने वाले नईम मजदूरी पर बक्से बनाने का काम करते है। परिवार में पत्नी साहना के साथ तीन बच्चे हैं। कई बार ऑनलाइन आवेदन कर चुके है, नगर पंचायत के भी तमाम चक्कर काट चुके है मगर राशन कार्ड नहीं बना। नईम के मुताबिक तहसील वाले उन्हें नगर पंचायत भेज देते हैं और नगर पंचायत वाले तहसील का रास्ता बता देते हैं। दोनों जगह चक्कर काट-काटकर थक गए तो घर बैठ गए। वार्ड नौ की हमसीरन ,अर्चना शर्मा, परबीन बेगम भी नईम की तरह चक्कर काटते-काटते थक गईं, लेकिन उनका राशन कार्ड नही बना। मोहल्ला नौगमा की सुषमा और अनीता देवी ने नगर पंचायत के एक दलाल को घूस तक दी, लेकिन राशन कार्ड नही बना। साहूकारा की दीपा, विनीता और निर्मला देवी भी पात्र होने के बावजूद राशन कार्ड हासिल नहीं कर पा रही है।
सप्लाई विभाग ने हजारों यूनिट उड़ाए कोटेदारों को मिल रहीं हैं बद दुआएं
हाल ही में सप्लाई विभाग ने बगैर कोई कारण बताए सैकड़ों लोगों के राशन कार्ड के यूनिटों में अच्छी-खासी कटौती कर दी है। नगर पंचायत क्षेत्र में यूनिटों की कटौती हजारों में बताई जा रही है। कोटेदारों का कहना है कि यह सप्लाई विभाग की करतूत है, लेकिन राशन कार्ड धारकों का गुस्सा उन पर उतर रहा है क्योंकि वे इसके लिए उन्हीं को जिम्मेदार मान रहे हैं। पूरा राशन न मिलने की वजह से वे उन्हें खरी-खोटी सुनाने के साथ बद दुआएं भी दे रहे हैं। कोटेदारों का कहना है कि कई बार कटे हुए यूनिट बहाल करने के लिए भी आवेदन किए जा चुके हैं लेकिन कोई सुनने को ही तैयार नहीं है।